Kolkata : दक्षिण पूर्व रेलवे ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले पुराने और कमजोर पुलों को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू किया है। मिशन-3000 एमटी के तहत माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से करीब 4500 करोड़ रुपये की पुल परियोजनाओं ( South Eastern Railway) को मंजूरी दी गई है।
रेलवे के अनुसार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य पुलों को 25 टन एक्सल लोडिंग के अनुरूप तैयार करना है। इसके लिए पुराने गर्डरों को बदलने, सब-स्ट्रक्चर को मजबूत करने, पुलों के पुनर्निर्माण और नए गर्डर लगाने जैसे (South Eastern Railway) कार्य किए जाएंगे।
41 पुलों में लगेंगे नए स्टील गर्डर
दक्षिण पूर्व रेलवे के मेगा और मेजर पुलों में लगे पुराने स्टील गर्डरों को हटाकर नए गर्डर लगाए जाएंगे। ये गर्डर 25T-2008 लोडिंग मानक के अनुरूप होंगे। इसके साथ पुलों के सब-स्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जाएगा। इस श्रेणी में 41 पुलों की री-गर्डरिंग को मंजूरी मिल चुकी है।
38 पुलों में लगाए जाएंगे कंपोजिट गर्डर
रेलवे ने 38 पुलों के पुराने स्टील गर्डरों को हटाकर उनकी जगह बैलेस्टेड डेक कंपोजिट गर्डर लगाने की योजना बनाई है। इनका निर्माण भी 25T-2008 लोडिंग के अनुसार किया जाएगा। जरूरत के मुताबिक पुलों के सब-स्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जाएगा।
137 पुलों में लगेंगी PSC स्लैब
12.2 मीटर तक के स्पैन वाले 137 पुलों में पुराने स्टील गर्डरों को हटाकर बैलेस्टेड डेक प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) स्लैब लगाए जाएंगे। यह काम इंडियन रेलवे ब्रिज मैनुअल-2024 के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
20 मेगा-मेजर पुलों का होगा पुनर्निर्माण
दक्षिण पूर्व रेलवे ने 20 मेगा और मेजर पुलों के पुनर्निर्माण की भी पहचान की है। इन पुलों को डायवर्टेड अलाइनमेंट पर नए सिरे से बनाया जाएगा। इनमें हावड़ा-खड़गपुर रेलखंड पर रूपनारायण नदी के ऊपर स्थित ब्रिज नंबर 57 डाउन, मिडिल और अप भी शामिल हैं।
1550 छोटे पुल और चार सुरंगें भी होंगी मजबूत
रेलवे ने छोटे पुलों और सुरंगों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया है। करीब 1550 छोटे पुलों और चार सुरंगों के पुनर्वास, सुदृढ़ीकरण या पुनर्निर्माण के कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है।
पुलों पर सुरक्षा इंतजाम भी बढ़ाए जा रहे
गर्डर पुलों पर यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए साइड पाथवे और मैन रिफ्यूज जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। अब तक 199 पुलों पर साइड पाथवे उपलब्ध कराया जा चुका है, जबकि 35 अन्य पुलों पर काम चल रहा है।
रेलवे का कहना है कि इन परियोजनाओं से दक्षिण पूर्व रेलवे के पुलों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी। साथ ही भारी मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता में इजाफा होगा और मिशन-3000 एमटी के तहत माल ढुलाई को गति मिलेगी।
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