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मानगो नगर निगम चुनाव में दो प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर, वोटकटवा उम्मीदवारों ने बढ़ाया सियासी तापमान

Jamshedpur (Jharkhand) : मानगो नगर निगम चुनाव ( Mango Nagar Nigam Election) इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। मैदान में दो मुख्य प्रत्याशियों के बीच सीधी और कांटे की लड़ाई देखने को मिल रही है। Mango Nagar Nigam Election के दोनों ही उम्मीदवारों को बड़ी राजनीतिक ताकतों का समर्थन हासिल है। लेकिन इस सीधी टक्कर को और उलझा रहे हैं वे प्रत्याशी, जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में ”वोटकटवा” कहा जा रहा है।

चुनावी मैदान में इस बार तीन तरह के उम्मीदवार नजर आ रहे हैं। पहली श्रेणी में वे प्रत्याशी हैं, जो पूरी तैयारी और जीत के इरादे से चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी श्रेणी में वे लोग हैं, जो राजनीति में किस्मत आजमाने के शौक में मैदान में उतरे हैं और अगली बार के लिए जमीन तैयार करना चाहते हैं। तीसरी और सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली श्रेणी वोटकटवा उम्मीदवारों की है, जिन्हें बड़े खिलाड़ी रणनीति के तहत मैदान में उतारते हैं।

मानगो नगर निगम में जीत की रेस में असल में दो ही उम्मीदवार माने जा रहे हैं। दोनों ही प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़ी हैं और उनके पति क्षेत्रीय राजनीति में जाना-पहचाना नाम हैं। इसके इतर कई प्रत्याशी ऐसे हैं जिनका लक्ष्य जीत से ज्यादा वोट काटना बताया जा रहा है। यही वजह है कि प्रचार के दौरान यह आकलन लगातार किया जा रहा है कि कौन कितना वोट काट पाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वोटकटवा उम्मीदवारों की वजह से हर बार चुनाव का गणित बिगड़ जाता है। मानगो रोड नंबर दो के निवासी सलीम खान के मुताबिक, अगर वोट ज्यादा नहीं कटे तो मुकाबला बेहद रोचक होगा। वहीं रोड नंबर 14 के रहने वाले शाद अली मानते हैं कि वोटकटवा संस्कृति पर अब लगाम लगनी चाहिए, क्योंकि यही उम्मीदवार दो-तीन हजार वोट काटकर पूरे चुनाव का रुख बदल देते हैं।

चर्चा में एक ऐसी उम्मीदवार भी हैं, जिन्होंने दिल्ली में अपना डेरा जमा रखा है और जिनका प्रचार सीमित इलाकों तक ही सिमट गया है। शुरुआत में उनका प्रभाव नजर आया, लेकिन समर्थकों की अराजकता और लगातार हमलावर बयानबाजी से उनका असर कमजोर पड़ता दिख रहा है। जनता के बीच यह धारणा बन रही है कि वे जिस परिवारवाद का आरोप दूसरों पर लगाती हैं, उसी राजनीति का हिस्सा खुद भी हैं।

दूसरी ओर, एक प्रमुख प्रत्याशी का वोट काटने के लिए डिमना रोड और आसपास की बस्तियों में भी वोटकटवा सक्रिय हैं। स्थानीय लोग अब पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं। डिमना रोड की सुभाष कॉलोनी निवासी राजू सिंह कहते हैं कि जनता समझ चुकी है कि कौन गंभीर उम्मीदवार है और कौन सिर्फ नुकसान पहुंचाने के लिए खड़ा हुआ है।

इन सबके बीच एक उम्मीदवार ऐसी भी हैं, जिनका राजनीतिक रिश्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ा बताया जा रहा है। राजनीति उनके लिए पारिवारिक विरासत है और शायद इसी वजह से वे अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं। प्रचार-प्रसार के मामले में वे भी पीछे नहीं हैं और शिक्षा के स्तर पर उन्हें सबसे आगे माना जा रहा है।

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कुल मिलाकर, मानगो नगर निगम चुनाव में असली लड़ाई दो प्रत्याशियों के बीच है, लेकिन वोटकटवा उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है। अब देखना यह है कि जनता रणनीति को समझकर किसे अपना समर्थन देती है और किसकी चाल नाकाम होती है।

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