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मानगो नगर निगम चुनाव: कांग्रेस में बगावत तेज, नए जिला अध्यक्ष पर उठे सवाल

Jamshedpur (Jharkhand) : मानगो नगर निगम चुनाव के बीच कांग्रेस की अंदरूनी कलह (Mango Nagar Nigam Election) खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के नए जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह संगठन में बढ़ती अनुशासनहीनता पर काबू पाने में असफल दिख रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित करना पड़ा।

दरअसल, कांग्रेस समर्थित मेयर प्रत्याशी सुधा गुप्ता जो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी हैं, के खिलाफ पार्टी के भीतर से ही मोर्चा खोल (Mango Nagar Nigam Election) दिया गया है। जितेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी पार्वती देवी को चुनाव मैदान में उतार दिया और खुद उनके प्रचार में जुट गए। इसे पार्टी लाइन के खिलाफ कदम मानते हुए कार्रवाई की गई।

Mango Nagar Nigam Election: जेबा खान पहले ही हो चुकी हैं निलंबित

इससे पहले कांग्रेस नेता फिरोज खान की पत्नी जेबा खान ने भी मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। पार्टी ने उन्हें छह वर्षों के लिए प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। बावजूद इसके, दोनों बागी प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं, जिससे कांग्रेस को सीधा नुकसान होता दिख रहा है।

 आलाकमान के दबाव में हुई कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, जितेंद्र सिंह पर कार्रवाई को लेकर जिला इकाई में असमंजस की स्थिति थी। कुछ नेता उनके निष्कासन के पक्ष में नहीं थे। लेकिन मामला प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश तक पहुंचा और दिल्ली से दबाव बनने के बाद अंततः निष्कासन का निर्णय लिया गया।

कहा जा रहा है कि यदि नामांकन से पहले जिला स्तर पर बैठक कर सहमति बना ली जाती, तो स्थिति इतनी न बिगड़ती। कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही आगाह किया था, लेकिन समय रहते पहल नहीं की गई।

 जिला अध्यक्ष के खिलाफ बढ़ रहा असंतोष

पार्टी के अंदर अब जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। नेताओं का मानना है कि संगठनात्मक कमजोरी और समन्वय की कमी के कारण बगावत को हवा मिली। नामांकन के बाद स्थिति को नियंत्रित करना कठिन हो गया है।

Mango Nagar Nigam Election: पहले भी बागी रुख अपना चुके हैं जितेंद्र सिंह

कांग्रेस कार्यालय प्रभारी संजय सिंह आजाद ने जारी पत्र में पुष्टि की है कि जितेंद्र सिंह को छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया है। पत्र में उल्लेख है कि उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी पार्टी लाइन के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय भी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया था। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी में वापसी करते हुए अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में काम करने का आश्वासन दिया था, लेकिन नगर निकाय चुनाव में फिर बागी रुख अपनाने से पार्टी नेतृत्व सख्त हो गया।

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नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस की यह अंदरूनी खींचतान अब खुली चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में इसका असर चुनावी परिणामों पर कितना पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी।

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