Jamshedpur (Jharkhand) : मानगो नगर निगम चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी को जमशेदपुर में एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष और धनबाद जिला के पूर्व पार्टी प्रभारी रहे राजकुमार श्रीवास्तव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा (Jamshedpur BJP Leader Resignation )देने का एलान कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने और भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होने की बात कही है।
यह पूरा मामला मानगो नगर निगम के मेयर चुनाव से जुड़ा है। राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव मेयर पद की प्रत्याशी हैं। भाजपा ने पहले ही यह निर्देश जारी किया था कि कोई भी पदाधिकारी पार्टी समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगा। बावजूद इसके, पत्नी का नामांकन वापस न लेने और प्रचार से दूरी न बनाने के कारण राजकुमार श्रीवास्तव को पार्टी की ओर से नोटिस जारी किया गया।
नोटिस मिलने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने उस दौर में भाजपा के लिए काम किया है जब पार्टी के पास सीमित संसाधन थे और वे साइकिल से प्रचार किया करते थे। 45 वर्षों तक पार्टी की सेवा करने के बाद आज उनसे अपनी पत्नी का साथ छोड़ने को कहा जा रहा है, जो उन्हें स्वीकार नहीं है।
राजकुमार श्रीवास्तव (Jamshedpur BJP Leader Resignation) ने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय से निष्ठावान और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। पद और धन के बल पर आए लोगों को तरजीह दी जा रही है, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं को हाशिये पर धकेला जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गलत बयान देने वालों को जिम्मेदारी मिल रही है और कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच की दूरी बढ़ गई है।
उन्होंने संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि पुराने कार्यकर्ताओं को टूटने से बचाने की सीख देने वाले अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को आज भुला दिया गया है।
राजकुमार श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि नामांकन के बाद न तो प्रदेश और न ही केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे संपर्क किया। यहां तक कि राष्ट्रीय महामंत्री अरुण कुमार सिंह के जमशेदपुर दौरे के दौरान भी उनसे मुलाकात की पहल नहीं हुई, जिससे उन्हें गहरी पीड़ा पहुंची।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि मानगो नगर निगम चुनाव गैर-दलीय है और उनकी पत्नी का चुनाव किसी पार्टी चिन्ह पर नहीं हो रहा है। इन्हीं कारणों से आहत होकर उन्होंने भाजपा छोड़ने और राजनीति से संन्यास लेने का निर्णय लिया।




