Jamshedpur : झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता तथा निबंधन विभाग के मंत्री रामदास सोरेन (Ramdas Soren Funeral) का शनिवार की शाम जमशेदपुर के घोड़ाबांधा श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा उनके घोड़ाबांधा आवास से निकली, जिसमें उनके पुत्र और परिजनों ने कंधा दिया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल रहा।
अंतिम यात्रा में नेताओं की मौजूदगी
अंतिम संस्कार (Ramdas Soren Funeral) में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, बहरागोड़ा विधायक समीर मोहंती, पोटका विधायक संजीव सरदार, झामुमो प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी, पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप बालमुचू, मंत्री दीपक बिरुवा, पूर्व मंत्री दिनेश षाड़ंगी, अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान समेत कई नेता और मंत्री शामिल हुए।
घोड़ाबांधा आवास पर उमड़ा जनसैलाब
रामदास सोरेन का पार्थिव शरीर जब घोड़ाबांधा आवास पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग अंतिम जोहार कहने पहुंचे। यहां कई मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
घाटशिला से रांची होते हुए पहुंचे जमशेदपुर
रामदास सोरेन का पार्थिव शरीर सुबह दिल्ली से रांची लाया गया था। वहां विधानसभा में श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद सड़क मार्ग से घाटशिला पहुंचाया गया। घाटशिला के एचसीएल ग्राउंड में अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे। समर्थकों ने “रामदास सोरेन अमर रहें” के नारे लगाए। घाटशिला में श्रद्धांजलि के बाद उनका पार्थिव शरीर जमशेदपुर लाया गया।
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शनिवार दोपहर करीब तीन बजे उनका पार्थिव शरीर साकची स्थित पार्टी कार्यालय लाया गया। यहां झामुमो नेताओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पूर्व मंत्री मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि उनका जाना पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। झारखंड आंदोलनकारी डेमका सोय ने आंदोलन के दिनों को याद किया और बताया कि सोरेन कई बार जेल भी गए। झामुमो नेता सागेन पूर्ति ने कहा कि उन्होंने 1990 से लेकर अब तक पार्टी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने की सीख दी।
रामदास सोरेन, जो घाटशिला विधायक थे, अपने घोड़ाबांधा आवास में बाथरूम में फिसलकर गिर पड़े थे। उन्हें पहले टीएमएच जमशेदपुर ले जाया गया और फिर डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली अपोलो अस्पताल रेफर किया। वहीं शुक्रवार रात उनका निधन हो गया।
पूरे झारखंड में शोक की लहर
झामुमो नेताओं, समर्थकों और जनता ने उन्हें झारखंड आंदोलन का योद्धा और संघर्षशील नेता बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी। जमशेदपुर, घाटशिला और रांची में हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।




