Tehran : ईरान ने अमेरिका की ओर से इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के माध्यम से भेजे गए युद्धविराम (सीजफायर) (Iran America Ceasefire Proposal) के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ऐसा कोई भी अस्थायी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसमें भविष्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई न होने की ठोस और विश्वसनीय गारंटी न हो।
रिपोर्ट के अनुसार, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे। यहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय हालात तथा संभावित युद्धविराम (Iran America Ceasefire Proposal)पर चर्चा की।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें प्रस्ताव के सभी बिंदुओं की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन फिलहाल यही एक प्रस्ताव विचाराधीन था। हालांकि, तेहरान ने साफ कर दिया कि वह ऐसे किसी अस्थायी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े मुद्दों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था न हो।
अमेरिका पर भरोसे की कमी बनी सबसे बड़ी वजह
ईरान का मानना है कि अमेरिका पहले भी कई बार समझौतों से पीछे हट चुका है। तेहरान अक्सर वर्ष 2018 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन द्वारा परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकलने का उदाहरण देता है। ईरान का दावा है कि उस समय अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों ने उसकी प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की थी, फिर भी अमेरिका समझौते से हट गया।
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत देने के बजाय अमेरिका ने समय-समय पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए और कूटनीतिक वार्ता के साथ दबाव की नीति जारी रखी। ऐसे में केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर किसी नए प्रस्ताव को स्वीकार करना पुराने अनुभवों को दोहराने जैसा होगा।
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अब्बास अराघची ने कहा- ईरान और इराक के संबंध बेहद महत्वपूर्ण
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि ईरान और इराक के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा के क्षेत्र में गहरे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए इराकी प्रधानमंत्री की यह यात्रा विशेष महत्व रखती है और दोनों देशों ने साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।




