News Bee : ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी ने कहा है कि इस्लामिक गणराज्य की मिसाइल शक्ति ने इज़राइल की क्षेत्रीय दादागिरी (Iran America Tension) को रोक दिया है और उसे उसकी सीमा में रहने को मजबूर कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि ईरान अपनी रक्षात्मक क्षमता को किसी भी तरह की बातचीत का हिस्सा (Iran America Tension) नहीं बनाएगा।
मंगलवार को ओमान की राजधानी मस्कट की यात्रा के दौरान लारिजानी ने कहा कि ज़ायोनी शासन पूरे क्षेत्र पर वर्चस्व कायम करना चाहता था, लेकिन ईरान की मिसाइलों ने उसकी रणनीति को विफल कर दिया। उन्होंने हाल के महीनों में इज़राइल के खिलाफ किए गए जवाबी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन कार्रवाइयों ने ईरान की ताकत और प्रतिरोध क्षमता को साबित किया है।
लारिजानी के अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई में ईरान ने सैकड़ों बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें दागीं, जिनका निशाना इज़राइल के संवेदनशील और रणनीतिक ठिकाने थे। यह कार्रवाई कथित तौर पर इज़राइल-अमेरिका के दबाव और टकराव के जवाब में की गई थी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ जारी अप्रत्यक्ष बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित है। किसी अन्य विषय को इसमें शामिल करने की कोशिश वार्ता को विफल कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि यदि बातचीत व्यावहारिक और सम्मानजनक दायरे में रहती है, तो सकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इस दौर की वार्ता को अच्छी शुरुआत बताया है और कहा है कि अमेरिका को धमकियों और दबाव की नीति से बचना होगा।
मस्कट यात्रा के दौरान ईरान और ओमान के बीच आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। लारिजानी ने बताया कि निवेश, व्यापार और द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान को लेकर कई संभावनाओं पर विचार किया गया। ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने भी आर्थिक संबंध मजबूत करने का समर्थन जताया।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते इस तनाव का असर भारत के राज्यों, खासकर औद्योगिक गतिविधियों वाले झारखंड जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि पश्चिम एशिया की अस्थिरता का सीधा प्रभाव तेल कीमतों, व्यापार और निवेश पर पड़ता है।




