राज्यपाल की सलाह के बाद जाकिर हुसैन पार्क के करीब टांग दिया था पोस्टर
न्यूज़ बी रिपोर्टर, रांची: राजधानी रांची में 10 जून को निकले जुलूस के बाद हुए बवाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस पर हुए पथराव की घटना में शामिल युवाओं का पोस्टर जाकिर हुसैन चौक पर टंगवाने वाले एसएसपी सुरेंद्र झा फंसते नजर आ रहे हैं। गृह विभाग के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का ने उनसे जवाब तलब कर लिया है कि आखिर उन्होंने आरोपियों के पोस्टर किसके आदेश से टांगे थे। गृह विभाग के प्रधान सचिव ने इस तरह की कार्रवाई को उच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत बताया है। शोकाज का जवाब एसपी को 2 दिनों के अंदर देना होगा। गौरतलब है कि 10 जून को राजधानी रांची में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के खिलाफ भाजपा की पूर्व नेत्री नूपुर शर्मा और पूर्व नेता नवीन जिंदल ने टिप्पणी की थी। उस टिप्पणी के विरोध में राजधानी रांची में जुलूस निकाला गया था। जुलूस मेन रोड पर इकरा मस्जिद से निकलकर डोरंडा की तरफ शांतिपूर्ण तरीके से गया। वहां से यह शांतिपूर्ण जुलूस मेन रोड पर भी पहुंचा। मेन रोड पर जब यह जुलूस फिराया लाल चौक की तरफ आगे बढ़ रहा था तो पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की। पुलिस से युवकों की बहस के बाद जुलूस आगे की तरफ रवाना हुआ। लेकिन हनुमान मंदिर से थोड़ा पहले पुलिस ने फिर इसे रोका और यहीं से बवाल शुरू हुआ। कुछ लोगों का आरोप है वहां मौजूद एक इमारत से पत्थर फेंके गए और गोलियां भी चलाई गईं। तभी पुलिस ने भी लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज और सामने की इमारत से हो रहे पथराव के जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी पथराव शुरू किया। तभी पुलिस ने भी गोलियां चलानी शुरू कीं। सीधी गोली चलाई गई। इसमें 2 लोगों ने मौके पर जान गंवा दी। इस घटना के बाद राज्यपाल ने रांची एसएसपी को तलब कर पूछा था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर सीधे फायरिंग क्यों की। वाटर कैनन, रबर बुलेट और हवाई फायरिंग के विकल्पों को क्यों नहीं अपनाया गया। रांची पुलिस ने राज्यपाल के इस सवाल का तो जवाब नहीं दिया। लेकिन राज्यपाल ने पोस्टर टांगने की जो सलाह दी उस पर अमल जरूर किया। पोस्टर टंगते ही झामुमो ने इसका विरोध किया और कुछ ही देर में पोस्टर हटा लिया गया। लेकिन, अब पोस्टर टांगे जाने के बारे में एसएसपी सुरेंद्र झा को जवाब देना होगा।




