Jamshedpur (Jharkhand) : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी किनारे उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बालू खनन के दौरान जमीन के अंदर से दो विशाल और बेहद खतरनाक बम (Jamshedpur bomb disposal) बरामद हुए। करीब 227-227 किलो वजन वाले ये बम पिछले लगभग 80 सालों से रेत में दबे हुए थे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि ये आज भी सक्रिय अवस्था में थे।
घटना पानीपड़ा-नागसुड़ाई इलाके की है, जहां 7 मार्च को मजदूर खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान सबसे पहले सिलेंडरनुमा बम दिखाई दिया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया।
सेना की बम निरोधक टीम ने जांच के बाद पुष्टि की कि ये बम अत्यधिक शक्तिशाली हैं। इन पर ‘AN-M64’ और ‘Made in USA’ अंकित मिला, जिससे इनके द्वितीय विश्व युद्ध काल के होने की आशंका जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बम संभवतः किसी सैन्य विमान से गिरकर यहां पहुंचे और समय के साथ रेत में दब गए।
कंट्रोल्ड ब्लास्ट से किया गया निष्क्रिय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना की विशेष टीम को बुलाया गया। बुधवार 25 मार्च को बमों को निष्क्रिय (Jamshedpur bomb disposal) करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए नदी किनारे करीब 100 मीटर गहरा गड्ढा तैयार किया गया, जिसमें बमों को रखकर कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया।
सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के 5 किलोमीटर क्षेत्र को खाली कराया गया। गड्ढे को 500 से ज्यादा मिट्टी की बोरियों से ढककर विस्फोट को नियंत्रित किया गया। जैसे ही ब्लास्ट हुआ, तेज धमाकों से पूरा इलाका गूंज उठा। ग्रामीणों ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि कुछ पल के लिए जमीन कांपती महसूस हुई और कान सुन्न हो गए।
80 साल बाद भी क्यों ‘जिंदा’ रहे बम?
विशेषज्ञों के अनुसार, ये बम रेत और कीचड़ में दबे रहने के कारण सुरक्षित अवस्था में बने रहे। ऑक्सीजन की कमी और बाहरी छेड़छाड़ न होने से इनका विस्फोट नहीं हुआ, बल्कि ये अंदर ही अंदर सक्रिय बने रहे। यही वजह है कि इतने वर्षों बाद भी ये खतरनाक साबित हो सकते थे।
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सुरक्षा और अवैध खनन पर उठे सवाल
इस घटना ने अवैध बालू खनन और सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय रहते इन बमों का पता नहीं चलता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।




