NewsBee : ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अमेरिका (Iran America Tension) के साथ होने वाली अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने के लिए स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा (Geneva) पहुंच गए हैं।
अब्बास अरागची एक उच्चस्तरीय कूटनीतिक और विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व (Iran America Tension) कर रहे हैं। यह बातचीत मंगलवार को होगी, जिसमें ईरान और अमेरिका (United States) के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठेंगे, बल्कि ओमान (Oman) मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिनेवा दौरे के दौरान अब्बास अरागची स्विट्ज़रलैंड और ओमान के अपने समकक्षों के अलावा इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक और अन्य अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।
इससे पहले 6 फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी, जिसमें ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अब्बास अरागची और अमेरिकी टीम का नेतृत्व अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे थे। वार्ता को ईरान ने अच्छी शुरुआत बताया था।
ईरान की मुख्य मांग है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जाए। तेहरान का साफ कहना है कि बिना ठोस आर्थिक लाभ के कोई भी समझौता व्यावहारिक रूप से बेकार होगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) Donald Trump के पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किए जाने से तनाव बढ़ गया है। पेंटागन ने हाल ही में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर और हजारों सैनिक भेजने की पुष्टि की है।
युद्ध-विरोधी संगठनों ने चेतावनी दी है कि नया सैन्य टकराव विनाशकारी साबित हो सकता है। उन्होंने जून 2025 के 12-दिवसीय युद्ध का हवाला देते हुए संयम बरतने की अपील की है।
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इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत में भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। युद्ध की स्थिति में भारत को भी सावधान रहना होगा।




