Jamshedpur (Jharkhand) : टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी के भारतीय कारोबार का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 5,055 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, भारत में कंपनी का राजस्व 23 प्रतिशत (Tata Steel Q2 Results) की बढ़ोतरी के साथ 42,653 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी ने शनिवार, 7 नवंबर को दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए।
30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान भारत में टाटा स्टील का EBITDA 10,634 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 25 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस अवधि में कंपनी का क्रूड स्टील टाटा स्टील का भारतीय PAT 20 प्रतिशत बढ़कर 5,055 करोड़ रुपये पहुंचा, कंपनी का EBITDA भी मजबूत हुआ।उत्पादन पिछली तिमाही के मुकाबले 7 प्रतिशत( Tata Steel Q2 Results) बढ़कर 61.8 लाख टन हो गया। वहीं, स्टील डिलीवरी में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 59.8 लाख टन तक पहुंच गई।
कंसोलिडेटेड EBITDA में 14 प्रतिशत की वृद्धि
दूसरी तिमाही में टाटा स्टील का कुल कंसोलिडेटेड राजस्व 65,436 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का EBITDA 10,665 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 14 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन करीब 16 प्रतिशत रहा।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान कंपनी का कुल राजस्व 1,26,231 करोड़ रुपये और EBITDA 20,035 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले EBITDA में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारतीय कारोबार बना टाटा स्टील की सबसे बड़ी ताकत
कंपनी के भारतीय कारोबार ने पहली छमाही में भी मजबूत प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत का राजस्व 79,641 करोड़ रुपये और EBITDA 20,541 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने 26 प्रतिशत का EBITDA मार्जिन हासिल किया, जो पिछले साल की तुलना में EBITDA में 27 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
ऑटोमोटिव और स्पेशल प्रोडक्ट्स कारोबार ने भी दूसरी तिमाही में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस क्षेत्र में बिक्री करीब 11 लाख टन रही। वहीं, हाई-एंड उत्पादों की बिक्री में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
टाटा टिस्कॉन की बिक्री पिछले 12 महीनों में करीब 27 लाख टन तक पहुंच गई, जिससे लगभग 1.8 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म आशियाना और DigECA का संयुक्त ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 2,961 करोड़ रुपये रहा। इसमें सालाना आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यूरोप में नीदरलैंड का प्रदर्शन सुधरा, ब्रिटेन में चुनौतियां
यूरोप में कंपनी का कारोबार मिला-जुला रहा। नीदरलैंड में दूसरी तिमाही के दौरान राजस्व 1,395 मिलियन यूरो और EBITDA 72 मिलियन यूरो रहा। अगस्त की शुरुआत में डायरेक्ट शीट प्लांट दोबारा शुरू होने से उत्पादन और लागत प्रबंधन में सुधार हुआ।
दूसरी ओर, ब्रिटेन में कंपनी का राजस्व 411 मिलियन पाउंड रहा और डिलीवरी 3.8 लाख टन दर्ज की गई। कमजोर मांग, आयात की अधिकता और बाजार में स्टॉक बढ़ने के कारण वहां कारोबार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, यूके इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है।
नीलाचल इस्पात में क्षमता विस्तार की तैयारी
टाटा स्टील ने दूसरी तिमाही में करीब 3,280 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया। पहली छमाही में कंपनी का कुल कैपेक्स 6,860 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी की प्रमुख परियोजनाओं में नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड की क्षमता को बढ़ाकर 4.8 MTPA करने की योजना शामिल है। इसके अलावा 0.7 MTPA क्षमता वाली हॉट रोल्ड पिकलिंग एंड गैल्वनाइजिंग लाइन और टिनप्लेट विस्तार परियोजना पर भी काम जारी है।
कंपनी पर 91,423 करोड़ रुपये का नेट कर्ज
सितंबर 2026 के अंत तक टाटा स्टील का नेट डेट 91,423 करोड़ रुपये रहा। नेट डेट और EBITDA का अनुपात 2.4 गुना दर्ज किया गया। कंपनी के पास 40,076 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी उपलब्ध थी, जिसमें करीब 10,300 करोड़ रुपये नकद और नकद समकक्ष शामिल हैं।
पहली छमाही में कंपनी ने लागत बचत के जरिए करीब 1,793 करोड़ रुपये हासिल किए। पूरे वित्त वर्ष के लिए 7,140 करोड़ रुपये की लागत बचत का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान कंपनी ने 4,989 करोड़ रुपये का डिविडेंड भुगतान भी किया।
सीईओ टीवी नरेंद्रन ने क्या कहा?
टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। मजबूत सप्लाई चेन और ग्राहकों के साथ बेहतर तालमेल से बिक्री और कमाई में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत कंपनी के प्रदर्शन का प्रमुख आधार बना हुआ है। ऑटोमोटिव, स्पेशल प्रोडक्ट्स, टिनप्लेट और डाउनस्ट्रीम कारोबार में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
वहीं, टाटा स्टील के कार्यकारी निदेशक एवं सीएफओ कौशिक चटर्जी ने कहा कि भारत में उत्पादन बढ़ने और नीदरलैंड में परिचालन सामान्य होने से कंपनी को फायदा मिला है। कंपनी का फोकस लागत कम करने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और वर्किंग कैपिटल के बेहतर प्रबंधन पर बना हुआ है।




