Jamshedpur : झारखंड के मशहूर नागाडीह मॉब लिंचिंग केस ( Nagadih Mob Lynching )में अदालत ने गुरुवार को पांच मुल्जिमों को मुजरिम क़रार दिया। यह फ़ैसला प्रथम अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश विमलेश सहाय की अदालत ने सुनाया।
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गौरतलब है कि 18 मई साल 2017 को नागाडीह में जमीन देखने गए जुगसलाई नया बाजार निवासी विकास वर्मा, उनके भाई गौतम वर्मा, उनकी दादी राम सखी देवी और गाढाबासा के रहने वाले गंगेश गुप्ता को भीड़ ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। इस केस में आज अदालत ने राजाराम हांसदा (इस वक़्त जेल में), रंगो पूर्ति, गोपाल हांसदा, सुनील सरदार और तारा मंडल को धारा 148, 349/149, 302/149, 341/149, 342/149, 338/149 और 117 के तहत कसूरवार पाया है। इनकी सज़ा पर बहस 8 अक्टूबर को होगी।
अभियोजन पक्ष की पैरवी एडवोकेट सुशील कुमार जायसवाल, जगत विजय सिंह और सुधीर कुमार पप्पू ने की। वहीं, सबूतों की कमी के चलते बाक़ी अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया।
मृतकों के परिजनों ने (Nagadih Mob Lynching) केस में इस फ़ैसले पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “चार इंसानों का क़त्ल सिर्फ़ पांच लोग नहीं कर सकते।” उन्होंने मुजरिमों को फांसी की सज़ा देने की मांग की और साफ़ किया कि जिन अभियुक्तों को बरी किया गया है, उनकी सजा के लिए हाईकोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती दी जाएगी।
यह मामला जमशेदपुर के नागाडीह इलाक़े में हुए उस दर्दनाक वाक़ए से जुड़ा है जिसने पूरे झारखंड में सनसनी फैला दी थी। अब सबकी निगाहें 8 अक्टूबर पर हैं, जब अदालत सज़ा का एलान करेगी।




