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मानगो नगर निगम चुनाव: पार्टी विरोधी गतिविधियों पर जेबा खान 6 साल के लिए कांग्रेस से निलंबित, जानिए पूरा विवाद

Jamshedpur (Jharkhand) : मानगो नगर निगम चुनाव (Mango Nagar Nigam Election) को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पार्टी लाइन के खिलाफ चुनाव मैदान (Mango Nagar Nigam Election) में उतरने पर कांग्रेस ने मेयर पद की उम्मीदवार शाइस्ता परवीन उर्फ जेबा खान को 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है।

कांग्रेस के जिला प्रभारी बलजीत सिंह बेदी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि जेबा खान को कई बार समझाया गया कि वे कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सुधा गुप्ता के खिलाफ चुनाव न लड़ें। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला नेतृत्व तक ने उनसे बातचीत की, लेकिन उन्होंने नामांकन वापस लेने से इनकार कर दिया। इसे पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

जेबा की राजनीतिक पृष्ठभूमि

जेबा खान, कांग्रेस नेता फिरोज खान की पत्नी हैं। फिरोज खान पहले झारखंड विकास मोर्चा में सक्रिय थे। साल 2012 में म्यांमार की घटना को लेकर डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन हुआ था। इस घटना में पथराव के दौरान एक पुलिस कर्मी घायल हुआ था। इस मामले में फिरोज खान भी नामजद थे। कोर्ट से उनके खिलाफ वारंट था। साल 2014 में जब फिरोज खान ने जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा सीट से नामांकन भरा तो बिष्टुपुर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उनके जेल जाने के बाद पहली बार जेबा खान ने सियासत में कदम रखा था और अपने पति का चुनाव प्रचार किया था।

बाद में वर्ष 2016 में फिरोज खान कांग्रेस में शामिल हुए। साल 2017 में मानगो में बने झारखंड एकता मोर्चा के आंदोलन के दौरान हुए बवाल में उनका नाम सामने आया था। इस मामले में उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया था और जेल भी गए थे। तब से जेबा खान ने ही राजनीतिक मोर्चा संभाला। मानगो क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ी।

 उम्मीदवार को लेकर टकराव

मानगो नगर निगम चुनाव की घोषणा के बाद जेबा खान ने मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। वहीं कांग्रेस ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जेबा खान को मनाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे चुनाव लड़ने के फैसले पर अडिग रहीं।

सूत्रों की मानें तो 2024 विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को अंदरूनी भितरघात का नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में पार्टी इस बार अनुशासन के मुद्दे पर सख्त रुख अपना रही है।

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अब देखना यह होगा कि जेबा खान चुनावी मैदान में कितना असर दिखा पाती हैं और इसका कांग्रेस की रणनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है। क्योंकि, साल 2014 में फिरोज खान कोई बहुत ज्यादा वोट हासिल नहीं कर पाए थे। उन्हें मुट्ठी भर वोट ही मिले थे। जबकि, मानगो में बन्ना गुप्ता का नेटवर्क मजबूत है।

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