Jharkhand Politics: सुप्रियो भट्टाचार्य के ‘विषैला सांप’ बयान ने बढ़ाया सियासी पारा, कांग्रेस ने सरकार को ही कठघरे में खड़ा किया
Ranchi (Jharkhand) : झारखंड की सियासत में अब अंदरखाने सुलग रही चिंगारी खुलकर शोला बनती दिख रही है। सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख घटक झामुमो और कांग्रेस अब आमने-सामने आ खड़े (Jharkhand Politics) हुए हैं। असम विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के अलग-अलग राह पकड़ने का असर अब झारखंड की राजनीति में भी साफ झलकने लगा है। बयानबाज़ी का दौर ऐसा तेज हुआ है कि सियासी रिश्तों में तल्खी खुलकर सामने आ गई है।
दरअसल, झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को ‘विषैला सांप’ करार देकर सियासी भूचाल ला दिया। इस तीखे बयान ने गठबंधन की सेहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस (Jharkhand Politics) ने भी बिना देर किए पलटवार किया और अपनी ही सरकार के कामकाज पर उंगली उठा दी।
हजारीबाग के विष्णुगढ़ और धनबाद के बलियापुर में हुई दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर कांग्रेस नेताओं ने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह फेल बताते हुए पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया। यह हमला कहीं न कहीं सरकार की कार्यशैली पर सीधा सवाल है, जिसमें खुद कांग्रेस भी साझेदार है।
चाईबासा में आयोजित कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर के समापन के बाद पार्टी प्रभारी के राजू ने भी साफ संकेत दे दिए कि गठबंधन की गाड़ी पटरी से उतरती दिख रही है। उन्होंने माइनिंग लॉबी के बढ़ते दखल, किसानों को मुआवजे में हो रही देरी और शिक्षा व्यवस्था की गिरती हालत को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। इतना ही नहीं, बड़कागांव समेत पूरे राज्य में आंदोलन छेड़ने की चेतावनी देकर कांग्रेस ने अपने तेवर और तल्ख कर दिए।
उधर, झामुमो ने भी मोर्चा संभालते हुए दो टूक जवाब दिया। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि कांग्रेस को अगर कोई शिकायत है तो उसे सरकार के भीतर उठाना चाहिए, न कि मीडिया में बयानबाज़ी कर माहौल बिगाड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर कांग्रेस आरोपों की बौछार करेगी, तो झामुमो भी चुप नहीं बैठेगा।
इस सियासी घमासान के बीच विपक्षी भाजपा ने मौके पर चौका लगाने की कोशिश की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि गठबंधन के भीतर की यह खींचतान ‘ऊपर से एक, अंदर से अलग’ वाली राजनीति को उजागर करती है। उनका आरोप है कि जनता के मुद्दों से भटकी यह सरकार सिर्फ सत्ता संतुलन बचाने में जुटी है।
इसे भी पढ़ें – जमशेदपुर में खूनी वारदात: सीतारामडेरा में फायरिंग की आशंका, चापड़ से हमला कर दो युवक गंभीर रूप से घायल
फिलहाल, झारखंड की राजनीति में बयानबाज़ी का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है। अब देखना यह है कि यह तकरार महज शब्दों तक सीमित रहती है या गठबंधन की नींव को भी हिला देती है।




