Jamshedpur(Jharkhand ) : डुमरी विधायक जयराम महतो के समर्थन में जमशेदपुर के पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो और आभा महतो ने गुरुवार को आवाज (Jharkhand Jairam Mahto Case) बुलंद की। दोनों पूर्व सांसदों ने अपने आवासीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि एक निर्वाचित विधायक के पीछे पूरी राज्य पुलिस का पड़ जाना गंभीर और चिंताजनक मामला है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का इस मामले में मूकदर्शक बने रहना राज्यहित में नहीं है। यह मामला अब विधायिका और कार्यपालिका के बीच टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। सरकार को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा इसके (Jharkhand Jairam Mahto Case) गंभीर परिणाम झारखंड को भुगतने पड़ सकते हैं।
पूर्व सांसदों ने आशंका जताई कि 8 से 10 सितंबर के बीच झारखंड पुलिस संगठन अपनी रणनीति तय कर सकता है। यदि मामला आंदोलन तक पहुंचता है तो यह राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक स्थिति पैदा कर सकता है।
शैलेंद्र महतो ने कहा कि बरवाअड्डा थाना परिसर मेंटाटा स्टील के कर्मचारियों को मिलेगा ₹315 करोड़ का वार्षिक बोनस, जमशेदपुर में बंटेंगे ₹163.85 करोड़ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर सीसीटीवी फुटेज की जांच की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विधायक ने सरकारी कार्य में किस तरह और कितनी बाधा डाली।
उन्होंने आरोप लगाया कि धनबाद के बरवाअड्डा थाना की पुलिस ने जयराम महतो के खिलाफ गलत तरीके से प्राथमिकी दर्ज की है। उनका कहना था कि जयराम महतो जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और जनता की समस्याओं को लेकर थाना प्रभारी से बातचीत कर रहे थे।
विधायक के कथित गाली-गलौज वाले ऑडियो के वायरल होने के सवाल पर शैलेंद्र महतो ने कहा, “एक हाथ से ताली नहीं बजती।” उन्होंने कहा कि संभव है कि थाना प्रभारी की ओर से भी ऐसी कोई बात कही गई हो, जिससे विधायक नाराज हुए हों।
इसे भी पढ़ें – टाटा स्टील के कर्मचारियों को मिलेगा ₹315 करोड़ का वार्षिक बोनस, जमशेदपुर में बंटेंगे ₹163.85 करोड़
पूर्व सांसदों ने कहा कि यदि जयराम महतो के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पुलिस आंदोलन की राह अपनाती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति होगी। सरकार को मामले को टकराव की स्थिति में पहुंचने से पहले संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालना चाहिए।




