Jamshedpur (Jharkhand) : शब-ए-बारात (Jamshedpur Shab-E-Barat) के मौके पर मानगो स्थित शिया जामा मस्जिद में 12वें इमाम हजरत महदी अलैहिस्सलाम की विलादत बड़े अदब और अकीदत के साथ मनाई गई। Jamshedpur Shab-E-Barat के अवसर पर महफिल-ए-मिलाद और कसीदाख्वानी का आयोजन किया गया, जिसमें शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। पूरी मस्जिद इबादत, दुआ और जिक्र से गुलजार रही।
महफिल की शुरुआत तिलावत और नात-मनकबत से हुई, इसके बाद स्थानीय शायरों ने इमाम महदी अलैहिस्सलाम और अहलेबैत की शान में अपने कलाम पेश किए। कसीदाख्वानी का आयोजन सैयद इनाम अब्बास की ओर से किया गया।
सैयद इनाम अब्बास ने पढ़ा, देर से ही सही है यह हमको यकीं, लेने मौला का इंतकाम, वारिस-ए-जुल्फेकार आएगा। खुदा की आखिरी हुज्जत जमाने का सहारा हो, तुम्हारे नाम से रौशन फलक का हर सितारा हो। उनके कलाम ने महफिल में इंतजार-ए-इमाम और इंसाफ की उम्मीद को जिंदा कर दिया।
शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जकी हैदर ने कर्बला के मैदान में हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम की बहादुरी का जिक्र करते हुए पढ़ा, अमां नहीं है कहीं कारजार हस्ती में, कछार छोड़ कर शेर आ गया है बस्ती में। खुदा का फजल बशर पर तमाम बाकी है, नाम इस्लाम का, परचम, इमाम बाकी है। उनके कलाम ने श्रोताओं को जज्बाती कर दिया।
वसी हसन ने इमामों की याद में पढ़ा, हर रात इब्ने हैदर व जहरा की याद हो, हर दिन जरूर वालियो आका की याद हो, एक और ईद आ गई मौला नहीं आए, बस यह ख्याल ए दर्द अलम साथ साथ हो।
अफसर हसनैन ने अपने कसीदे में कहा, यह 14 हैं तो इलाही निजाम जिंदा है, इन्हीं के नाम से खालिक का नाम जिंदा है। मना के जश्न बताते हैं हम जमाने को, हम ही वह लोग हैं जिनका इमाम जिंदा है।
इफ्तिखार अली ने पढ़ा, सहर करीब अंधेरों को दूर होना है, जलील दुश्मन-ए-दीं को जरूर होना है। बता रही हैं यह तब्दीलियां जमाने की, किसी वली का यकीनन जहूर होना है।
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महफिल के बाद शब-ए-बारात के आमाल अदा किए गए और परंपरा के तहत स्वर्णरेखा नदी में अरीजा भी डाला गया। पूरी रात लोगों ने दुआ, इबादत और अजादारी में वक्त गुजारा।
धार्मिक मान्यता है कि 12वें इमाम हजरत महदी अलैहिस्सलाम पर्दा-ए-गैब में हैं और दुनिया में जब जुल्म बढ़ जाएगा, तब वह जाहिर होकर इंसाफ कायम करेंगे। इसी यकीन और अकीदत के साथ मानगो की यह महफिल आस्था और भाईचारे का संदेश देती नजर आई।




