Jamshedpur : क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने सीजीपीसी (सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) (Jamshedpur CGPC) के प्रधान सरदार भगवान सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान सिंह को शायद पद और कुर्सी तो प्यारी है, लेकिन सिख मर्यादा और पंथिक सिद्धांतों से कोई सरोकार नहीं है।
कुलविंदर सिंह के अनुसार, अगर भगवान सिंह में पंथ के प्रति सच्चा समर्पण होता, तो वे अब तक श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के अनुसार यह घोषणा कर चुके होते कि 1 सितंबर 2025 से केवल वही व्यक्ति गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (Jamshedpur CGPC) में पद पर बना रहेगा, जो सिख रहित मर्यादा के अनुरूप है।
श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अनदेखी?
अकाल तख्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गुरुद्वारा कमेटी में पदधारी वही बन सकता है जिसने—
* खंडे बाटे की पाहुल ली हो,
* पांच ककार धारण कर रखे हों,
* दाढ़ी व केश न कटवाए हों,
* केश रंगे न हों,
* और नशा-पान से दूर हो।
कुलविंदर सिंह का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर प्रेस बयान जारी करने वाले और बड़ी-बड़ी रैलियां करने वाले भगवान सिंह पंथिक मर्यादा जैसे गंभीर विषय पर चुप्पी साधे बैठे हैं।
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“खुद से करें शुरुआत, फिर दूसरों को समझाएं”
उन्होंने सवाल उठाया कि भगवान सिंह खुद क्यों नहीं मानगो गुरुद्वारा कमेटी और आनंद विहार हिल व्यू कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा से इसकी शुरुआत करते? अगर उनमें सच में धार्मिक आत्मा और जिम्मेदारी बची है, तो सबसे पहले खुद को और अपनी कमेटी को सिख मर्यादा के अनुसार परिपूर्ण करें।
“जिसमें जमीर जिंदा है, वही करेगा पंथ का काम”
कुलविंदर सिंह ने कहा कि जिसके अंदर जमीर जिंदा है और जो पद का लालची नहीं है, वही ऐसे साहसी कदम उठा सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि यह आदेश सिर्फ चीफ खालसा दीवान के लिए नहीं, बल्कि पहले से ही सभी गुरुद्वारा कमेटियों के लिए मान्य है।




