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जाकिरनगर इमामबारगाह में निकला अमारी व ताबूत का जुलूस, 67 दिनों का गम खत्म, आज ईद-ए-जहरा

Jamshedpur (Jharkhand ) : इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के गम में मनाया जा रहा 67 दिनों का अय्याम-ए-अजा आठ रबीउल अव्वल को संपन्न हो गया। इस मौके पर शनिवार को मानगो स्थित जाकिरनगर इमामबारगाह में आखिरी मजलिस (Jamshedpur Muharram) आयोजित की गई। मजलिस के बाद अलम, ताबूत, गहवारा और अमारी का जुलूस निकाला गया। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके परिवार की शहादत का जिक्र सुनकर अजादारों की आंखें नम (Jamshedpur Muharram) हो गईं।

इस दौरान 11वें इमाम हजरत हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शहादत को भी याद किया गया। इसी के साथ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत से जुड़ा 67 दिनों का गम समाप्त हो गया। रविवार, नौ रबीउल अव्वल को शिया समुदाय ईद-ए-जहरा मनाएगा।

मुहर्रम से शुरू हुए अय्याम-ए-अजा की अंतिम मजलिस जाकिरनगर इमामबारगाह में दोपहर करीब एक बजे शुरू हुई। मजलिस को मौलाना जकी हैदर ने खिताब किया। उन्होंने लोगों को नेक अमल करने और पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम तथा उनके अहलेबैत की शिक्षाओं पर चलने की हिदायत (Jamshedpur Muharram) दी।

मजलिस में मौलाना जकी हैदर ने कर्बला के शहीदों का दर्दनाक मंजर बयान किया। उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के 18 वर्षीय बेटे हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम की शहादत का जिक्र किया। अली अकबर की शहादत के बाद इमाम हुसैन के गहरे दुख और पिता-पुत्र के प्रेम के मार्मिक प्रसंग को सुनकर अजादार रो पड़े।

जमशेदपुर मुहर्रम

मजलिस में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के छह माह के बेटे हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम और उनके भाई हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम की शहादत का भी जिक्र किया गया। इसके अलावा आठ रबीउल अव्वल को 11वें इमाम और 12वें इमाम हजरत महदी अलैहिस्सलाम के वालिद हजरत हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शहादत को भी याद किया गया।

मजलिस के बाद जुलूस बरामद हुआ। इसमें इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का ताबूत, हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम का गहवारा, अलम और अमारियां शामिल थीं। कर्बला की घटना के बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बेटे चौथे इमाम हजरत जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम तथा उनके घर की महिलाओं और बच्चों को कैद कर दमिश्क ले जाया गया था। कैद से रिहाई और कारवां के मदीना लौटने की याद में अमारियां निकाली जाती हैं।

जुलूस के दौरान नौहाखानी और सीनाजनी की गई। रेहान समेत अन्य नौहाखानों ने नौहे पढ़े। अजादारों ने अलविदाई मातम कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और शहीदाने कर्बला को पुरसा दिया।

 रविवार को मनाई जाएगी ईद-ए-जहरा

नौ रबीउल अव्वल को शिया मुसलमान ईद-ए-जहरा मनाएंगे। यह दिन कर्बला की घटना के बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के हत्यारों को सजा दिए जाने की खुशी से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार जनाब मुख्तार ने कूफा में हुकूमत कायम करने के बाद कर्बला के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

मान्यता है कि नौ रबीउल अव्वल को कर्बला की यजीदी फौज के सेनापति अम्र इब्ने साद को सजा-ए-मौत दी गई थी। इसके बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बेटे हजरत जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के मुस्कुराने की रिवायत मिलती है। इसी खुशी में इस दिन को ईद-ए-जहरा के रूप में मनाया जाता है।

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ईद-ए-जहरा के अवसर पर शिया परिवार गम के काले कपड़ों को उतारकर रंगीन कपड़े पहनना शुरू करते हैं। घरों में विभिन्न पकवान बनाए जाते हैं और खुशी का इजहार किया जाता है।

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