NGT के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई, बैकुंठ नगर में 13 में चार मकान तोड़े गए; दो खुद लोगों ने तोड़ लिए, कुंवर बस्ती और चाणक्यपुरी में भी चली जेसीबी
Jamshedpur (Jharkhand) : मानगो क्षेत्र में सरकारी जमीन और स्वर्णरेखा नदी किनारे कथित अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। बैकुंठ नगर, चाणक्यपुरी और कुंवर बस्ती में लगातार दूसरे दिन भी जेसीबी चली और कई मकानों को ध्वस्त (Jamshedpur Buldozer Action) किया गया। बैकुंठ नगर में शनिवार को 13 चिन्हित मकानों में से चार मकान तोड़े गए, जबकि दो कच्चे मकानों को उनके मालिकों ने स्वयं हटा लिया। वहीं, चाणक्यपुरी में तीन मकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। इससे पहले शुक्रवार को स्वर्णरेखा नदी किनारे कुंवर बस्ती में भी तीन मकान गिराए गए थे।
बड़े पैमाने पर चल रही इस कार्रवाई ने मानगो में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, नदी किनारे निर्माण, प्रशासनिक निगरानी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर बहस तेज कर दी है। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के तरीके और इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, तो सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई (Jamshedpur Buldozer Action) होनी चाहिए।
बैकुंठ नगर में 13 मकान चिन्हित, चार पर चली जेसीबी
मानगो के वार्ड नंबर 10 अंतर्गत बैकुंठ नगर में शनिवार को जिला प्रशासन का बुलडोजर पहुंचा। यहां सरकारी जमीन पर बने चार मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान दो कच्चे मकानों को उनके मालिकों ने स्वयं तोड़ लिया।
इस तरह वार्ड नंबर 10 में अब तक कुल छह मकान हटाए जा चुके हैं। इस क्षेत्र में प्रशासन ने 13 मकानों को चिन्हित किया है। इनमें से सात मकानों पर कार्रवाई बाकी है। अधिकारियों के अनुसार, इन मकानों तक पहुंचने का रास्ता काफी संकरा है, जिसके कारण जेसीबी को अंदर ले जाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रशासन अब इन निर्माणों को हटाने के लिए आगे की रणनीति तय करेगा।
साईं सूरज आश्रम की बाउंड्री पर भी कार्रवाई की तैयारी
बैकुंठ नगर में स्थित साईं सूरज आश्रम की बाउंड्री पर भी कार्रवाई की संभावना है। हालांकि इस इलाके तक पहुंचने वाला रास्ता काफी संकरा होने के कारण प्रशासन के सामने तकनीकी चुनौती बनी हुई है। अब यह तय किया जाएगा कि संकरी गलियों में स्थित कथित अवैध निर्माणों को किस प्रकार हटाया (Jamshedpur Buldozer Action) जाए।
बैकुंठ नगर में चल रही कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस बल भी मौजूद रहा। किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर शुरू हुई कार्रवाई
प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का हवाला दिया जा (Jamshedpur Buldozer Action) रहा है। बैकुंठ नगर के वार्ड नंबर 10 में 13 मकान मालिकों के खिलाफ मामला चलाया गया था। इसके बाद मानगो अंचल प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन और नदी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना जरूरी है। विशेष रूप से स्वर्णरेखा नदी किनारे अनियंत्रित निर्माणों को नदी क्षेत्र और पर्यावरण के लिए खतरा माना जा रहा है।
चाणक्यपुरी में तीन मकान पूरी तरह ध्वस्त
मानगो के चाणक्यपुरी इलाके में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शनिवार को जारी रही। शुक्रवार को यहां तीन मकानों को तोड़ने का काम शुरू किया गया था। इनमें दो मकानों को पहले आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त किया गया था।
शनिवार को कार्रवाई आगे बढ़ाई गई और तीनों मकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। लगातार दो दिनों से चल रही कार्रवाई के बाद प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच चिंता और नाराजगी ( Jamshedpur Buldozer Action) देखी गई।
कुंवर बस्ती में स्वर्णरेखा किनारे तीन मकान गिराए गए
शुक्रवार को मानगो के कुंवर बस्ती इलाके में भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की थी। स्वर्णरेखा नदी से सटे तीन मकानों को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस की तैनाती के कारण स्थिति नियंत्रण में (Jamshedpur Buldozer Action) रही।
मानगो के अंचलाधिकारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि जिन मकानों पर कार्रवाई की गई थी, उन्हें पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। निर्धारित समय के भीतर निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
कार्रवाई के बाद तीन परिवारों के आशियाने मलबे में तब्दील हो गए। इससे प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
लोगों ने पूछा- जमीन बिकती रही तो जिम्मेदार कौन?
अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन की निगरानी करना अंचल कार्यालय की जिम्मेदारी है। यदि किसी सरकारी जमीन पर वर्षों तक मकान बनते रहे, तो उस दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सरकारी जमीन पर निर्माण शुरू होता है, तब उसे रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं होती। मकान बनने और परिवारों के बस जाने के वर्षों बाद बुलडोजर कार्रवाई होने से आम लोगों के सामने गंभीर मानवीय और सामाजिक संकट खड़ा हो जाता है।
लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल दलालों और कथित रूप से जमीन बेचने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। यदि कोई व्यक्ति सरकारी जमीन को बेचता है और दूसरा व्यक्ति उसे खरीदकर मकान बना लेता है, तो जांच केवल अंतिम रूप से वहां रहने वाले परिवार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
कार्रवाई में भेदभाव का आरोप
कुंवर बस्ती और आसपास के लोगों ने प्रशासन पर कार्रवाई में भेदभाव बरतने का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अतिक्रमण हटाने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
लोगों का आरोप है कि स्वर्णरेखा नदी किनारे कई बड़े भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान वर्षों से मौजूद हैं, लेकिन उन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना ही प्रशासन का उद्देश्य है, तो बड़े और प्रभावशाली लोगों के कथित अवैध निर्माणों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
निष्पक्ष सर्वे और समान कार्रवाई की मांग
स्थानीय निवासियों ने पूरे मानगो क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी किनारे और सरकारी जमीन पर बने निर्माणों का व्यापक सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जहां भी अवैध कब्जा मिले, वहां बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जिन परिवारों के मकान ध्वस्त किए गए हैं, उनके सामने रहने का संकट पैदा हो गया है। प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ प्रभावित गरीब परिवारों की सामाजिक स्थिति पर भी विचार करना चाहिए।
संकरी गलियों में बाकी निर्माण हटाना प्रशासन के लिए चुनौती
बैकुंठ नगर में अभी सात चिन्हित मकानों पर कार्रवाई बाकी है। लेकिन यहां की संकरी गलियां और पहुंच की समस्या प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। जेसीबी नहीं पहुंच पाने के कारण कार्रवाई की रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
इसी प्रकार अन्य इलाकों में भी प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया, नोटिस, स्थानीय विरोध और प्रभावित परिवारों की स्थिति के बीच संतुलन बनाना होगा। रविवार को तोड़फोड़ की कार्रवाई ठप रहने की बात कही गई है, लेकिन आगे अभियान फिर तेज होने की संभावना है।
अब लोगों की नजर अगले कदम पर
मानगो में बैकुंठ नगर, चाणक्यपुरी और कुंवर बस्ती में हुई कार्रवाई के बाद अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। प्रशासन के सामने अब केवल चिन्हित मकानों को हटाने का सवाल नहीं है, बल्कि सरकारी जमीन की बिक्री के कथित नेटवर्क, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एक तरफ प्रशासन सरकारी जमीन और स्वर्णरेखा नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग चाहते हैं कि जांच और कार्रवाई का दायरा व्यापक हो। उनका कहना है कि कानून की कार्रवाई गरीब, छोटे और बड़े सभी लोगों के लिए एक जैसी होनी चाहिए।
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अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन बाकी सात चिन्हित मकानों के साथ-साथ मानगो के अन्य इलाकों में मौजूद कथित अतिक्रमणों पर भी इसी तरह कार्रवाई करता है या नहीं। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई से यह साफ होगा कि मानगो में अतिक्रमण हटाओ अभियान सीमित कार्रवाई तक रहेगा या सरकारी जमीन और नदी किनारे बने सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।




