बिजली जीएम से मिले वरिष्ठ नेता बाबर खान
Jamshedpur : (Jamshedpur Electricity )झारखंड सरकार की बिजली नीति, विशेषकर स्मार्ट और प्रीपेड मीटर की जबरन स्थापना तथा 200 यूनिट माफी योजना को लेकर ऑल इंडिया माइनॉरिटी सोशल वेलफेयर फ्रंट के केंद्रीय महासचिव और AMIM नेता बाबर खान ने तीखा विरोध जताया है। बाबर खान के नेतृत्व में आज एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के विद्युत महाप्रबंधक अजीत कुमार से मुलाकात कर छह सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
इस प्रतिनिधिमंडल में विद्युत कार्यपालक अभियंता बिशेश्वर मरांडी, हरिशंकर तिवारी, चंद्र भूषण, जमशेदपुर के विद्युत कार्यपालक अभियंता आनंद कौशिक, विद्युत अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, मानगो के सहायक अभियंता शाहनवाज अंसारी और कनिष्ठ अभियंता प्रशांत प्रतीक समेत विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
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बैठक के दौरान बाबर खान ने मानगो क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती और खराब आपूर्ति व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने विद्युत विभाग की लापरवाही को लेकर सवाल खड़े करते हुए इसे दूर करने और बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए 15 दिनों का समय दिया।
बाबर खान ने कहा कि बिना उपभोक्ताओं की सहमति के जबरन स्मार्ट और प्रीपेड मीटर लगाया जाना असंवैधानिक है और इसका जोरदार विरोध किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल मीटर बदलकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त यूनिट का बोझ डाला जाता है, जिससे उनकी जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
Jamshedpur Electricity : यूनिट की गलत गणना करता है स्मार्ट मीटर

Jamshedpur Electricity: जीएम से मिलते बाबर खान
उन्होंने 200 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना को “धोखा” करार देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार उपभोक्ताओं के प्रति वास्तव में गंभीर है, तो मैनुअल मीटर वापस लगाए। मैनुअल मीटर में उपभोग की गणना पारदर्शी और वैज्ञानिक होती है — 1000 वाट का एक उपकरण यदि एक घंटा चले, तो एक यूनिट बनता है, लेकिन स्मार्ट, डिजिटल या प्रीपेड मीटर में लोड के अनुसार यूनिट की गणना भिन्न होती है, जिससे उपभोक्ता को नुकसान होता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आम उपभोक्ताओं को सड़क पर उतरकर ‘हल्ला बोल आंदोलन’ के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद तहसीन हाशमी, मोहम्मद अफरोज आलम, गुलज़ार वारसी, सुल्तान अहमद, आफताब खान, शाहनवाज आलम, मोहम्मद इरशाद, मोहम्मद कामरान, नासिर हुसैन, मोहम्मद रेयान, मोहम्मद फैजान, ज़िद्दान हुसैन खान, रही खान, शेख रेहान, मोहम्मद सलाउद्दीन, सुल्तान खान, शहीर हुसैन खान समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए।




