Jamshedpur (Jharkhand) : जमशेदपुर के छाया नगर की तंग गलियों में किराए पर रहने वाला जमील इस्लाम उर्फ जुम्मन उर्फ जम्मू शेख। आज वह हर जुबान पर है। आज हर तरफ शहर में जुम्मन के कसीदे पढे जा रहे हैं। स्वर्णरेखा नदी घाट पर शनिवार की रात जब जुम्मन ने देखा कि ज्योति नाम की बच्ची नदी में बह रही है तो न अपनी जान की परवाह की और ना ही अपनी हवा मिठाई (कैंडी) की। अपनी जेब में अपनी कमाई और मोबाइल लिए हुए उफनाई नदी में कूद गया। बच्ची को बचा कर ही बाहर आया। आज उसे हर तरफ सम्मानित किया गया। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने पांच हजार रुपए और नया मोबाइल दिया क्योंकि जम्मू शेख (Jamshedpur Jammu Shekh) का मोबाइल भीगने की वजह से खराब हो गया। इसके अलावा भी कई संस्थाओं ने उसे सम्मानित किया। मगर, उसे असली सम्मान तब मिला जब शिक्षक समारोह के मंच पर उसे शिक्षकों से पहले ही सम्मानित कर दिया गया। वाह। Jamshedpur and Jammu Shekh.
‘शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का उत्थान’ कार्यक्रम में रविवार को शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की बड़ी भागीदारी रही। डीबीएमएस हाईस्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड की प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की स्थिति पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में सैकड़ों शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

Jharkhand Jammu Shekh
शिक्षक सम्मान समारोह शुरू होने से पहले विधायक सरयू राय ने जिउतिया पर्व के दौरान स्वर्णरेखा नदी में डूबी दो युवतियों में से एक की जान बचाने वाले जामू शेख को सम्मानित किया। जामू शेख हवा वाली मिठाई बेचते हैं। हादसे के दौरान उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाकर एक युवती को बाहर निकाला था।
सरयू राय ने जामू शेख (Jamshedpur Jammu Shekh) को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। हादसे के बाद लोगों को फोन कर मदद की अपील करने वाले शुभम को भी सम्मान मिला। दोनों के सम्मान के दौरान सभागार तालियों से गूंज उठा।
झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर सरयू राय ने उठाए सवाल
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विधायक सरयू राय ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के 21 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर नहीं हैं। 41 प्रतिशत स्कूलों में पुस्तकालय की सुविधा नहीं है, जबकि करीब 60 प्रतिशत विद्यालयों के पास अपनी जमीन नहीं है। 33 प्रतिशत स्कूलों में बाउंड्री और 75 प्रतिशत में स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध नहीं हैं।
सरयू राय ने कहा कि कई स्कूलों में शौचालय, बेंच-डेस्क और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है। शिक्षकों की कमी के साथ उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की समस्या भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा की बुनियाद ही कमजोर होगी तो नई शिक्षा नीति का अपेक्षित लाभ कैसे मिलेगा। सबसे पहले प्राथमिक शिक्षा की आधारभूत व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
शिक्षा में तकनीक और कौशल पर जोर
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने कहा कि किसी भी देश के विकास की बुनियाद शिक्षा होती है। बदलते दौर में विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी ज्ञान देने के बजाय कौशल, नवाचार और सामाजिक बदलाव से जोड़ना जरूरी है। शिक्षकों को भी एआई और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट करना होगा।
उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सीधे संवाद को महत्वपूर्ण बताया। प्रो. गुप्ता ने कहा कि केवल ऑनलाइन शिक्षा से वह प्रभाव हासिल नहीं किया जा सकता, जो शिक्षक के सामने बैठकर सीखने से संभव है।
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने विद्यालयी शिक्षा की कमियों को दूर करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य संवाद में आई कमी का असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ा है।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने शिक्षकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए एडवांस लेबोरेटरी प्रोग्राम और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
सोनादेवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि शिक्षकों और प्रतिभाशाली लोगों का सम्मान जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के बार-बार तबादले से विद्यार्थियों पर पड़ने वाले असर का भी उल्लेख किया।
शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की समस्याओं का समाधान जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया।
युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कहा कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाने का प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान कार्यक्रम को जमशेदपुर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि राज्य के सभी 24 जिलों में ऐसे आयोजन किए जाएंगे।
कार्यक्रम में प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और तकनीकी शिक्षा सहित छात्र-युवा असंतोष जैसे विषयों पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने शोधपत्र प्रस्तुत कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझाव दिए।
नौकरी के बजाय रोजगारपरक शिक्षा पर जोर
रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था का बड़ा लक्ष्य नौकरी हासिल करना बन गया है, जबकि सरकारी और निजी क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थी डिग्री हासिल कर रहे हैं, लेकिन उनके पास रोजगार के लिए जरूरी कौशल नहीं है। उन्होंने शिक्षा के साथ परीक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत बताई।
समापन सत्र में विधायक सरयू राय ने शिक्षा संबंधी नियमावली बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि नियमावली के अभाव में आवश्यकता आधारित शिक्षकों के सामने नौकरी की असुरक्षा बनी रहती है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सरयू राय ने बड़ी संख्या में मौजूद शिक्षकों को सम्मानित किया। खास बात यह रही कि सुबह करीब 10 बजे कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षक समापन तक सभागार में मौजूद रहे औरविभिन्न सत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
इसे भी पढ़ें – Jamshedpur Crime: मानगो में ब्राउन शुगर की 71 पुड़िया के साथ 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार, पहले से रहा है आपराधिक इतिहास




