News Bee : इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आवास के बाहर बुधवार को हालात बिगड़ गए। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कैदियों की रिहाई को लेकर ज़बरदस्त विरोध ( Israel Protest) किया और कई गाड़ियों, टायरों तथा रीसाइक्लिंग बिन्स को आग के हवाले कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया और संसद (नेस्सेट) के आसपास भी सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए नारेबाजी की। उनका साफ कहना था कि जब तक ग़ज़ा में कैद इज़राइली नागरिकों की सुरक्षित वापसी नहीं होती और फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की अदला-बदली नहीं की जाती, तब तक यह आंदोलन ( Israel Protest) जारी रहेगा।
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लोगों का आरोप है कि नेतन्याहू की ग़ज़ा सिटी में सैन्य कार्रवाई की योजना बंधक बनाए गए कैदियों की ज़िंदगी के लिए सीधा ख़तरा है। इसी मुद्दे को लेकर “नेशनल लाइब्रेरी” भवन पर भी सैकड़ों लोगों ने धरना दिया। इस दौरान पुलिस ने लाइब्रेरी की छत पर मौजूद 13 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया।
गौरतलब है कि जनवरी 2024 में हुई अस्थायी संघर्ष विराम संधि के दौरान कुछ इज़राइली बंधकों और फ़िलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया गया था। लेकिन, बाद में इज़राइल ने इस समझौते को बढ़ाने से इनकार कर दिया और ग़ज़ा पर हमले और तेज़ कर दिए।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों के बावजूद इज़राइल की कार्रवाई लगातार जारी है। अब तक 63,600 से अधिक फ़िलिस्तीनी, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं, मारे जा चुके हैं। 1.60 लाख से ज़्यादा घायल हैं, जबकि 10,000 लोग अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
झारखंड सहित भारत के कई हिस्सों से भी मानवीय अपीलें की जा रही हैं कि ग़ज़ा में युद्ध रोककर कैदियों की अदला-बदली की जाए और आम नागरिकों को राहत पहुंचाई जाए।




