News Bee : ईरान के सुप्रीम लीडर (Iranian Supreme Leader) सैयद अली अल हुसैनी खामनाई। इनके नाम से कथित सुपर पावर अमरीका भी खौफ खाता है। इसराइल का पीएम बेंजामिन नेतन्याहू तो इनका नाम सुन कर कांप उठता है। आपने वह प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी होगी जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनाई का नाम बोलते हुए बेंजामिन नेतन्याहू का गला सूख गया था और आवाज़ हलक में फंस गई थी। आइए जानते हैं कौन हैं सर्वोच्च नेता सैयद अली खामनाई।
ईरान के सर्वोच्च नेता (Iranian Supreme Leader) आयतुल्लाह अली खामेनाई का जन्म 1939 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे एक स्थानीय धार्मिक विद्वान जवाद खामेनेई के दूसरे बेटे हैं और उनका बचपन सादगी व सीमित संसाधनों के बीच बीता। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने कुरआन से शुरू की और बाद में मशहद के धार्मिक मदरसे में अध्ययन किया। 18 वर्ष की आयु में वे इराक के नजफ गए, जहां उन्होंने शिया इस्लामी क़ानून (फिक़्ह) की शिक्षा ली।
नायब इमाम सैयद अली खामनाई, ईरान की इस्लामी क्रांति के प्रणेता आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के शिष्य रहे। 1960 और 1970 के दशक में वे अमेरिका समर्थित शाह शासन के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय रहे। इसी कारण उन्हें शाह की खुफिया एजेंसी ‘सावाक’ ने कई बार गिरफ्तार भी किया था।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान इस्लामी गणराज्य बना। खामेनेई को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी काउंसिल का सदस्य बनाया गया और वे उप रक्षा मंत्री तथा तेहरान के इमाम-ए-जुमा भी बने। 1982 में वे ईरान के राष्ट्रपति चुने गए, इससे पहले एक बम धमाके में वे गंभीर रूप से घायल हुए, जिससे उनका दायां हाथ आंशिक रूप से निष्क्रिय हो गया। लेकिन, बम धमाके के बाद भी वह घटनास्थल से हटे नहीं बल्कि वहीं डटे रहे।
ईरान-इराक युद्ध (1980–1988) आयतुल्लाह खामनाई के राजनीतिक जीवन का अहम दौर रहा। इस युद्ध को ईरान में ‘पवित्र रक्षा’ कहा जाता है। इस दौरान उन्होंने युद्ध समर्थन सर्वोच्च परिषद के अध्यक्ष के रूप में और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर के तौर पर अहम भूमिका निभाई।
1989 में आयतुल्लाह खुमैनी के निधन के बाद आयतुल्लाह खामनाई को 88 सदस्यीय ‘एक्सपर्ट्स असेंबली’ ने ईरान का सर्वोच्च नेता (रहबर) चुना।
ईरानी संविधान के अनुसार सर्वोच्च नेता को सेना, न्यायपालिका, मीडिया और विदेश नीति पर व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। उनका शासन ‘विलायत-ए-फ़क़ीह’ सिद्धांत पर आधारित है, जो धार्मिक नेतृत्व को राजनीतिक सत्ता से जोड़ता है।

Iranian Supreme Leader
खामनाई अपनी साहित्य और कविता में रुचि के लिए भी जाने जाते हैं। वे अक्सर अपने भाषणों में शेरो-शायरी का प्रयोग करते हैं और कवि सम्मेलनों का आयोजन करते हैं।वैश्विक राजनीति में आयतुल्लाह खामनाई अमेरिका विरोधी रुख और पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ नीति के लिए पहचाने जाते हैं। यह विचारधारा ईरान की विदेश नीति की रीढ़ है।
आज भी उनके नेतृत्व, विचारधारा और शासन प्रणाली को ईरान में सुप्रीम माना जाता है। भारत के झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषक ईरान की इस धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था को वैश्विक शक्ति संतुलन के संदर्भ में देखते हैं। सैयद अली खामनाई
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अपनी नीतियों की वजह से पूरे विश्व में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। उनका एक सिद्धांत है पीड़ितों की मदद करना। बोस्निया में जब सर्ब ज़ुल्म कर रहे थे तो आयतुल्लाह खामनाई के निर्देश पर ईरानी एजेंसियों ने वहां सर्बों के खिलाफ सैनिक अभियान चलाया था। ईरान की सैनिक नीतियों के चलते ही बोस्निया सर्बों के ज़ुल्म से आजाद हुआ था।




