Tehran: युद्धविराम (सीजफायर) समाप्त होने के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध (Iran US War) तेज हो गया है। अमेरिका के पास अरबों डॉलर के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल रक्षा प्रणाली और शक्तिशाली नौसैनिक बेड़ा होने के बावजूद ईरान अपनी स्वदेशी सैन्य क्षमता के दम पर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति (Iran US War) पर कायम है।
इस युद्ध में अमेरिका पिछड़ता हुआ दिख रहा है। ईरानी सेना फ्रंट फुट पर है। ईरानी फौज कुवैत, बहरैन, सऊदी अरब और जार्डन समेत खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी फौजी अड्डों पर कहर बरपा रही है। 48 घंटे में ईरान ने अमेरिका के 4 MQ 9 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं। इसके अलावा, कई लुकास ड्रोन भी टपकाए गए हैं।
अमेरिकी अड्डे तबाह हो रहे हैं। 17 जुलाई की रात जार्डन के मुवफ्फिक अड्डे पर ईरानी मिसाइलों ने जो कहर बरपाया, उससे पेंटागन के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। यहां हुए हमले में नौ से अधिक अमेरिकी सैनिक हलाक हुए हैं। 15 से अधिक सैनिकों को ब्रेन इंज्यूरी हुई है। एक F 35 लड़ाकू विमान को मार गिराया गया है।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि देश में विकसित ड्रोन, मोबाइल मिसाइल यूनिट और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिकी सैन्य अभियानों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि पारंपरिक युद्ध में सीधे मुकाबले के बजाय कम लागत वाली असममित (Asymmetric) रणनीति अपनाकर अमेरिका की सैन्य योजना को जटिल बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भविष्य में सैन्य संतुलन को कितना प्रभावित करेगी, इस पर अभी स्पष्ट निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हालांकि हालिया घटनाक्रम यह संकेत देता है कि ईरान कम खर्च वाली प्रतिरोधक क्षमता के माध्यम से अमेरिका की परिचालन लागत बढ़ाने और उसकी तकनीकी बढ़त को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है।
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सीजफायर के टूटने के बाद दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियां लगातार जारी हैं। ऐसे में फारस की खाड़ी एक बार फिर दुनिया के सबसे संवेदनशील और अस्थिर क्षेत्रों में शामिल हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यहां होने वाला हर नया सैन्य घटनाक्रम व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का कारण बन सकता है।




