Tehran : ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयतुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका ने तेहरान के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन कर एक बार फिर साबित कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर न तो भरोसेमंद हैं और न ही उनका कोई मूल्य ( Iran America War) है।
शनिवार को जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि हाल ही में देशभर में आयोजित शोक सभाओं और अंतिम विदाई कार्यक्रमों में लाखों लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि ईरानी जनता अपने देश, इस्लामी व्यवस्था और राष्ट्रीय पहचान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध (Iran America War) है। उन्होंने तेहरान, क़ुम, मशहद समेत विभिन्न शहरों में उमड़ी भीड़ को राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक जागरूकता का प्रतीक बताया।
उन्होंने इन कार्यक्रमों में शामिल होने वाले वरिष्ठ धर्मगुरुओं, विद्वानों, बुद्धिजीवियों, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सरकारी संस्थानों, सैन्य बलों और प्रतिरोध मोर्चे के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
अमेरिका के साथ संबंधों पर टिप्पणी करते हुए आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन कर अमेरिका ने फिर साबित कर दिया है कि उसकी प्रतिबद्धताओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन दबाव, एकतरफा नीतियों और आक्रामक रवैये की राजनीति करता है तथा हालिया घटनाओं ने दुनिया के सामने अमेरिका का वास्तविक चेहरा उजागर कर दिया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका तनाव बढ़ाने की कोशिश करेगा तो ईरान और प्रतिरोध मोर्चा ऐसा जवाब देंगे जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उन्होंने हाल के दिनों में ईरानी सुरक्षा बलों और दक्षिणी क्षेत्रों के लोगों के साहस की भी सराहना की।
आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रीय एकता को देश की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में बताते हुए जनता और सरकारी अधिकारियों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इससे निर्दोष लोगों के साथ अन्याय या राष्ट्रीय एकजुटता को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
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अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बनाए रखना राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ईरान के विरोधियों को देश में किसी भी प्रकार की कमजोरी का संकेत नहीं मिलना चाहिए।




