News Bee: ईरान के फारस की खाड़ी स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार सुबह एक तेल टैंकर पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया गया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि टैंकर ने नौसेना की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरने की कोशिश (Iran America War) की थी। इसके बाद यह कार्रवाई की गई।
आईआरजीसी के जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, “प्रिमा” नाम का तेल टैंकर जलडमरूमध्य से गुजर रहा था। इस दौरान आईआरजीसी ने उसे कई बार चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में यहां से गुजरना सुरक्षित नहीं है और मार्ग पर प्रतिबंध लगाया गया है। चेतावनी के बावजूद टैंकर ने रास्ता नहीं बदला, जिसके बाद उस पर ड्रोन हमला (Iran America War) किया गया।
बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले आठ दिनों से तनाव के कारण कड़ी निगरानी में है। यह स्थिति तब बनी जब 28 फरवरी को तेहरान में संयुक्त अमेरिकी-इसराइली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई को शहीद कर दिया गया। इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
ईरान का कहना है कि अमेरिका ने फारस की खाड़ी में सैन्य तैनाती और ईरान पर किए गए हमलों के बाद शत्रु देशों से जुड़े तेल टैंकरों और व्यावसायिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीति पर असर डाल सकता है। इसका असर भारत और झारखंड जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव पूरे देश में महसूस किया जाता है।




