Jamshedpur : घाटशिला विधानसभा उपचुनाव 2025 में झामुमो के उम्मीदवार सोमेश सोरेन ने 38 हजार 601 मतों के भारी अंतर से भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को हरा दिया। इस चुनाव को लेकर भाजपा नेतृत्व को काफी उम्मीदें थीं। माना जा रहा था कि ‘कोल्हान टाइगर’ कहे जाने वाले चंपई सोरेन भाजपा को यह सीट दिला देंगे, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलटी निकली।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन के आक्रामक अभियान ने पूरे चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ दिया। इस जीत ने न सिर्फ जेएमएम को मजबूत किया बल्कि भाजपा के भीतर कई बड़े राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए। बाबूलाल सोरेन की सियासी जमीन खिसकती दिख रही है और चंपई सोरेन का राजनीतिक प्रभाव भी अब सवालों के घेरे में है।
सुबह मतगणना शुरू होते ही भाजपा के टेंट में गहमा-गहमी थी। ढोल-नगाड़ों की व्यवस्था से लेकर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी तक, माहौल एकतरफा उत्साह से भरा था। लेकिन पहले राउंड के नतीजे आते ही यह उत्साह पस्त पड़ गया। शुरुआती रुझानों में सोमेश सोरेन पहले, जेकेएलएम दूसरे और भाजपा के बाबूलाल सोरेन तीसरे स्थान पर थे। यह दृश्य भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए चौंकाने वाला था।
जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ते गए, जेएमएम की बढ़त और मजबूत होती गई। दसवें राउंड में जब सोमेश की लीड 20,807 मत तक पहुंच गई, भाजपा के नेताओं ने लगभग हार स्वीकार कर ली और टेंट खाली होने लगा। इसके उलट जेएमएम के टेंट में खुशी की लहर दौड़ गई। 11वें राउंड के बाद पटाखे फूटने लगे और मिठाइयां बांटी जाने लगीं।
मतगणना के दौरान सिर्फ तीन ही राउंड—चौथा, पांचवां और छठा—ऐसे रहे जिनमें भाजपा को जेएमएम से अधिक मत मिले। चौथे राउंड में बाबूलाल को 4043 और सोमेश को 3916 वोट मिले। पांचवें राउंड में बाबूलाल 4182 और सोमेश 3872 वोट पर रहे। छठे राउंड में भाजपा को सबसे अधिक राहत मिली, जब बाबूलाल ने 4456 वोट हासिल किए जबकि सोमेश 3569 पर रह गए। इसके अलावा सभी अन्य राउंड जेएमएम के ही नाम रहे। इस बढ़त ने अंत तक चुनाव को एकतरफा बनाए रखा।
पहले राउंड की गिनती ही चुनाव की तस्वीर साफ कर चुकी थी। इस राउंड में सोमेश सोरेन को 5450 मत मिले थे जबकि जेकेएलएम के रामदास मुर्मू को 3286 और भाजपा के बाबूलाल को मात्र 2204 मत मिले। बाबूलाल तीसरे स्थान पर थे और यह झटका भाजपा के लिए अप्रत्याशित था। दूसरे राउंड के बाद बाबूलाल भले ही दूसरे स्थान पर आ गए, लेकिन सोमेश की बढ़त 5454 वोट तक पहुंच चुकी थी। यह बढ़त धीरे-धीरे इतनी मजबूत हो गई कि अंत तक भाजपा इसे कम नहीं कर सकी।




