NewsBee : गाजा पट्टी में जारी युद्ध (Israel Palestine War) के बीच सिविल डिफेंस ने बड़ा खुलासा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब भी करीब 8,000 लोगों के शव ढहे हुए मकानों और इमारतों के मलबे के नीचे दबे हुए हैं। राहत और बचाव दल सीमित संसाधनों के साथ लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसल ने बयान जारी कर बताया कि कई इलाके ऐसे हैं, जहां तक अब भी राहत टीमें पूरी तरह नहीं पहुंच सकी हैं। भारी मशीनरी की कमी और लगातार क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण खोज अभियान धीमा पड़ गया है।
हाल ही में गाजा सिटी के शेख रदवान इलाके में इजरायली हमलों में ध्वस्त हुई इमारतों के मलबे से शवों को निकालने का प्रयास किया गया। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा सामने आने में अभी समय लगेगा।
इस बीच, Geneva Academy of International Humanitarian Law and Human Rights ने चेतावनी दी है कि अक्टूबर 2023 से शुरू हुए युद्ध में मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। संस्था के अनुसार, गाजा की आबादी में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो भारी जनहानि की ओर इशारा करती है।
अकादमी के अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून प्रोजेक्ट प्रमुख Stuart Casey-Maslen ने कहा कि यह स्थिति “अत्यंत गंभीर” है और मौजूदा आंकड़े तबाही की पूरी तस्वीर पेश नहीं करते।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अक्टूबर में अमेरिका की मध्यस्थता से हमास और इजरायल के बीच संघर्ष विराम (Israel Palestine War) समझौता हुआ था। हालांकि, जमीनी स्तर पर हिंसा और हमलों की घटनाएं पूरी तरह थमी नहीं हैं।
वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष के मानवीय प्रभाव को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। झारखंड सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में भी लोग इस मानवीय संकट पर चिंता जता रहे हैं। गाजा में 8,000 शव मलबे में दबे, सिविल डिफेंस का दावा। मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका, झारखंड में भी चिंता।




