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ईद-ए-गदीर आज पूरे झारखंड समेत दुनिया भर में मनाई गई, हजरत अली की इमामत की याद में सजीं महफिलें

Jamshedpur (Jharkhand ) : इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 18 जिलहिज्जा के मौके पर शुक्रवार को ईद-ए-गदीर का पर्व (Eid E Ghadir) पूरे झारखंड सहित दुनिया भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शिया समुदाय के लोगों ने नए वस्त्र धारण किए, घरों में विशेष पकवान तैयार किए और मस्जिदों में खास इबादतों का आयोजन किया। इस अवसर पर जमशेदपुर, रांची, धनबाद, हुसैनाबाद समेत कई शहरों में धार्मिक महफिलें आयोजित की गईं।

जमशेदपुर की शिया जामा मस्जिद में गुरुवार रात विशेष कार्यक्रम (Eid E Ghadir) का आयोजन हुआ, जहां स्थानीय शायरों ने हजरत अली अलैहिस्सलाम की शान में कसीदे पेश किए। वहीं रांची की शिया जामा मस्जिद में भी पेश इमाम मौलाना तहजीबुल हसन की अगुवाई में कसीदाख्वानी और धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए।

 गदीर-ए-खुम में हुआ था ऐतिहासिक ऐलान

इस्लामी इतिहास के अनुसार 18 जिलहिज्जा के दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ने सऊदी अरब के गदीर-ए-खुम नामक स्थान पर एक महत्वपूर्ण खुतबा दिया था। इसी दौरान उन्होंने हजरत अली अलैहिस्सलाम का हाथ उठाकर कहा था कि “जिसका मैं मौला हूं, उसके अली भी मौला हैं।”

शिया मान्यताओं के अनुसार इसी अवसर पर हजरत अली को पैगंबर का उत्तराधिकारी और उम्मत का इमाम घोषित किया गया था। यही वजह है कि शिया समुदाय ईद-ए-गदीर को अपनी सबसे बड़ी ईदों में से एक मानता है।

 ईद-ए-गदीर पर विशेष इबादतों का महत्व

मानगो के जवाहर नगर निवासी इफ्तेखार अली ने बताया कि ईद-ए-गदीर के दिन गुस्ल करना और विशेष नमाज अदा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। दोपहर की नमाज से पहले गुस्ल कर दो रकअत नमाज पढ़ी जाती है, जिसमें सूरह हम्द के बाद सूरह तौहीद, आयतुल कुर्सी और सूरह कद्र निर्धारित संख्या में पढ़ी जाती हैं। इसके बाद सलवात भेजी जाती है और अल्लाह से मगफिरत की दुआ की जाती है।

उन्होंने बताया कि इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना भी अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए नेक कार्यों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

 कई देशों में मनाई जाती है ईद-ए-गदीर

ईद-ए-गदीर भारत के अलावा ईरान, इराक, यमन, अफगानिस्तान, सऊदी अरब, बहरीन, लेबनान, सीरिया, तुर्किये और बांग्लादेश सहित अनेक देशों में मनाई जाती है। विशेष रूप से ईरान में इस पर्व को “ईद-ए-अकबर” के नाम से जाना जाता है। वहां शहरों को सजाया जाता है, रोशनी की जाती है, मिठाइयां बांटी जाती हैं और मस्जिदों में विशेष दुआओं व आमाल का आयोजन होता है। लोग एक-दूसरे को बधाई देने के साथ उपहार भी भेंट करते हैं।

ईद-ए-गदीर के अवसर पर झारखंड के जमशेदपुर, रांची, धनबाद समेत कई शहरों में धार्मिक महफिलों और विशेष इबादतों का आयोजन किया गया। जानिए गदीर-ए-खुम की ऐतिहासिक घटना और इस पर्व का धार्मिक महत्व।

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