Ranchi (Jharkhand) : झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबद्ध 17 डिग्री कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र से उर्दू ऑनर्स की पढ़ाई बंद किए जाने और कई अन्य कॉलेजों में उर्दू विषय की सीटें कम करने के फैसले का विरोध (Jharkhand Education) तेज हो गया है। झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष एस अली ने इसे छात्रों के शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला बताते हुए तत्काल निर्णय वापस लेने की मांग (Jharkhand Education) की है।
सोमवार को एस अली के नेतृत्व में छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि संयुक्त बिहार के समय से राज्य के कई डिग्री कॉलेजों में उर्दू ऑनर्स की पढ़ाई संचालित हो रही है, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की क्लस्टर प्रणाली का हवाला देकर बिना शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संबंधित पक्षों से राय लिए कई कॉलेजों में उर्दू ऑनर्स में नामांकन और पढ़ाई बंद कर दी गई है।
एस अली ने कहा कि इस फैसले से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को सबसे अधिक नुकसान होगा। बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर उर्दू विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे में अचानक उर्दू ऑनर्स की पढ़ाई बंद करना छात्रहित के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि उर्दू भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषा होने के साथ-साथ झारखंड की द्वितीय राजभाषा भी है। ऐसे में उर्दू ऑनर्स की पढ़ाई बंद करने से छात्रों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
छात्र संघ ने मांग की कि जिन 17 डिग्री कॉलेजों में उर्दू ऑनर्स की पढ़ाई और नामांकन बंद किया गया है, वहां इसे तत्काल फिर से शुरू किया जाए। साथ ही जिन कॉलेजों में सीटें घटाई गई हैं, वहां पहले की तरह सीटों की संख्या बहाल की जाए।
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इस अवसर पर असरार आलम, अलाउद्दीन अंसारी, सोनू इम्तियाज और इमरान अंसारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।




