Jamshedpur (Jharkhand) : लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर जमशेदपुर के बाबूडीह स्वर्णरेखा झरना घाट पर बस्तीवासियों ने इस बार भी अपनी मेहनत और सामूहिक सहयोग से अस्थायी ब्रिज (Jamshedpur Jharna Chat Ghat) तैयार किया है। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे यह पुल बनकर पूरी तरह तैयार हुआ। इसके बाद श्रद्धालु इसी ब्रिज के जरिए नदी के बीचों-बीच स्थित टापू तक पहुंच रहे हैं, जहां वे सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी मिथिलेश कुमार पांडे ने बताया कि इस अस्थायी पुल की शुरुआत वर्ष 2002 में की गई थी। तब से हर साल छठ पर्व के मौके पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इसी स्थान पर यह पुल (Jamshedpur Jharna Chat Ghat) बनाया जाता है, ताकि व्रती सुरक्षित रूप से नदी के टापू तक पहुंच सकें। इस बार भी लोहे के पाइप और प्लाईवुड से करीब पांच फीट चौड़ा पुल तैयार किया गया है, जिसके निर्माण में एक सप्ताह का समय लगा।
घाट परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है। बिजली की रोशनी, चेंजिंग रूम और श्रद्धालुओं के लिए चाय व दातून की व्यवस्था भी की गई है। बस्तीवासियों का कहना है कि यह सब सामूहिक प्रयास और आस्था की एकजुटता का परिणाम है।
दूसरी ओर, स्वर्णरेखा और खरकई नदी घाटों पर दोपहर बाद से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं सिर पर दौरा और पूजा सामग्री लेकर घाटों की ओर निकल पड़ीं। जैसे-जैसे सूरज अस्त हुआ, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई।
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प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। शहर के 38 घाटों पर कुल 300 से अधिक एनडीआरएफ जवानों की तैनाती की गई है। गांधी घाट पर एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम लगातार पानी के स्तर और श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
साकची स्वर्णरेखा घाट, पांडेय घाट, दोमुहानी, बिष्टुपुर बलीबधन घाट, बागबेड़ा और बड़ौदा घाट समेत सभी प्रमुख स्थानों पर छठी मइया के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। व्रतधारियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।




