Jamshedpur (Jharkhand ) : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्वर्णरेखा नदी किनारे बालू में दबा हुआ द्वितीय विश्व युद्ध के समय का एक शक्तिशाली बम (Bahragora Bomb Recovery) बरामद हुआ। यह बम इतना खतरनाक बताया जा रहा है कि रांची से पहुंची बम निरोधक टीम भी इसे निष्क्रिय करने में असमर्थ दिखी। अब इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए सेना के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
यह बम (Bahragora Bomb Recovery) शुक्रवार को मिला था। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने इसे लोहे का कोई बड़ा टुकड़ा समझा, लेकिन संदेह होने पर पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच के बाद पुष्टि की कि यह एक जिंदा बम है। इसके बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई और किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर रोक लगा दी गई।
शनिवार को रांची से बम निरोधक दस्ता बहरागोड़ा पहुंचा और बम की जांच की। टीम के प्रभारी नंद किशोर सिंह के अनुसार, बम आकार में बेहद बड़ा और अत्यधिक शक्तिशाली है। इसका वजन लगभग 227 किलो बताया गया है। उन्होंने साफ कहा कि यह बम उनकी टीम के दायरे से बाहर है और इसे निष्क्रिय करने के लिए सेना के विशेषज्ञों को बुलाना पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि यह बम संभवतः अमेरिकी निर्माण का है और इसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किसी लड़ाकू विमान से गिराया गया होगा, जो फटा नहीं और वर्षों तक बालू में दबा रहा। अब इसके बाहर आने से खतरा बढ़ गया है।
इधर, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बम मिलने वाले क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। आसपास के लोगों को वहां जाने से रोका जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में कई सैन्य गतिविधियां हुई थीं। उस समय विमानों का वजन कम करने के लिए हथियार नीचे गिराए जाते थे। संभव है कि यह बम उसी दौरान यहां गिरा हो।
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गौरतलब है कि करीब सात महीने पहले पश्चिम बंगाल के गोपीवल्लभपुर क्षेत्र में भी इसी तरह का एक बम मिला था, जिसे एयरफोर्स की मदद से सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया था। बहरागोड़ा के इस बम को लेकर भी अब सेना के विशेषज्ञों से संपर्क साधा जा रहा है और जल्द कार्रवाई की तैयारी चल रही है।




