Home > Jamshedpur > बहरागोड़ा में 80 साल पुराना ‘मौत का बम अमेरिकी नौसेना करती थी इस्तेमाल’, द्वितीय विश्व युद्ध का 500 पाउंड का AN-M64 जानिए कितना खतरनाक था

बहरागोड़ा में 80 साल पुराना ‘मौत का बम अमेरिकी नौसेना करती थी इस्तेमाल’, द्वितीय विश्व युद्ध का 500 पाउंड का AN-M64 जानिए कितना खतरनाक था

Jamshedpur /Bahragora : इलाके में हाल ही में मिले संदिग्ध बम की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यह द्वितीय विश्व युद्ध के समय इस्तेमाल किया जाने वाला 500 पाउंड का हाई-एक्सप्लोसिव एरियल बम AN-M64 जनरल पर्पस प्रकार का है, जिसे अमेरिका में सेना और नौसेना दोनों के उपयोग के लिए तैयार किया जाता था। (Bahragora American Bomb)

क्या है इस बम की खासियत?

यह बम करीब 531 पाउंड (लगभग 240 किलोग्राम) वजनी होता है, जिसमें करीब 262 पाउंड (लगभग 180 किलोग्राम) तक विस्फोटक (Bahragora American Bomb) भरा रहता था। इसमें दो तरह के विस्फोटक इस्तेमाल होते थे टीएनटी (TNT) या फिर टीएनटी और अमाटोल (50-50 मिश्रण)।

बम का बाहरी हिस्सा ऑलिव ड्रैब (हल्का हरा) रंग का होता है, जिस पर काले अक्षरों से स्टेंसिलिंग और पहचान के लिए पीले रंग की पट्टियां बनी होती हैं। इसके अगले हिस्से (नोज) पर फ्यूज लगाने की जगह होती है, जबकि पीछे की तरफ 185 मिमी का टेल प्लग लगा होता है।

 किन टारगेट पर होता था इस्तेमाल

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन बमों का इस्तेमाल दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जाता था। खासतौर पर:

* गोला-बारूद डिपो

* एयरक्राफ्ट और एयरबेस

* रेलवे ट्रैक और इंजन

* सैन्य वाहन और सप्लाई लाइन

‘AN’ का क्या मतलब है?

इस बम के नाम में ‘AN’ का मतलब होता है Army-Navy, यानी यह बम अमेरिकी सेना और नौसेना दोनों के लिए मानकीकृत (इंटरचेंजेबल) था। इसमें एक विशेष सस्पेंशन लग (हुक) भी लगा होता था, जिससे इसे ब्रिटिश सिस्टम में भी इस्तेमाल किया जा सकता था।

क्यों अभी भी खतरनाक?

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने वर्षों तक रेत या मिट्टी में दबे रहने के बावजूद ऐसे बम पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होते। इनके अंदर मौजूद विस्फोटक (TNT/Amatol) लंबे समय तक स्थिर रह सकते हैं और हलचल, झटके या तापमान बदलाव से भी सक्रिय हो सकते हैं।

इसे भी पढ़ें – बहरागोड़ा में 80 साल पुराने अमेरिकी बमों का कंट्रोल्ड ब्लास्ट, तेज धमाकों से दहला इलाका+VDO

 ऐतिहासिक महत्व भी

AN-M64 बम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों (Allied Forces) द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए गए थे। यह उस दौर की सैन्य तकनीक और युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं।

प्रशासन और बम निरोधक दस्ते द्वारा ऐसे बमों को नियंत्रित विस्फोट (कंट्रोल्ड ब्लास्ट) के जरिए निष्क्रिय करना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

You may also like
Jamshedpur Police: ‘जोहार पुलिस’ चैटबॉट शुरू, WhatsApp पर घर बैठे मिलेंगी कई सेवाएं+VDO
सिरोमन सिंह अकैडमी में स्वर्गीय ठाकुर सिरोमन सिंह की 26वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा
रघुवर दास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से की मुलाकात, संताली की ओलचिकी लिपि में पाठ्य सामग्री प्रकाशित करने का आग्रह
जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार ने छात्राओं से कहा—ज्ञान और प्रतिभा से देश के विकास में दें योगदान+VDO

Leave a Reply