Tehran : डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़ा बयान दिया है। IRGC के इंटेलिजेंस संगठन का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं—या तो ईरान के खिलाफ एक “नामुमकिन सैन्य कार्रवाई” या फिर एक “खराब समझौता”।
IRGC ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह टिप्पणी की। यह बयान उस समय आया जब ईरान ने अमेरिका के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई को स्थायी रूप से समाप्त करना है।
IRGC के अनुसार, ईरान के इस प्रस्ताव के बाद अब गेंद पूरी तरह से अमेरिका के पाले में है। संगठन ने कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिका के लिए सम्मानजनक रास्ता निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
बयान में कहा गया कि पेंटागन पर दबाव, चीन-रूस-यूरोप के रुख में बदलाव, अमेरिकी कांग्रेस को ट्रंप का “निष्क्रिय पत्र” और ईरान की शर्तों को स्वीकार करने जैसी स्थितियां यह संकेत देती हैं कि अमेरिका के पास सीमित विकल्प रह गए हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी और कमांडर मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर कई चरणों में हमले किए।
स्थिति को देखते हुए 8 अप्रैल को इस्लामाबाद की मध्यस्थता में अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन शुरुआती बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद ट्रंप ने एकतरफा रूप से युद्धविराम बढ़ाया, साथ ही ईरान पर “नौसैनिक नाकाबंदी” भी लागू कर दी।
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ईरान ने फिलहाल दूसरे दौर की बातचीत से दूरी बना रखी है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका की कड़ी शर्तें और ईरानी जहाजों के खिलाफ कार्रवाई समझौते में बाधा बन रही हैं।




