News Bee: ईरान में इसराइल कैसे हत्याएं करता है। इसकी क्या नायाब तकनीक है। इसके बारे में हम आज आपको बताएंगे। यह तकनीक है धोखे की। इसराइल अपने चाटुकार मुल्कों से ईरान के नेताओं से बातचीत कराता है। जब ईरान के नेता बातचीत में लग जाते हैं तो इसराइल उनको उनके फोन नंबरों से ट्रेस कर लेता है। (Iran America War)
कैसे हुई कासिम सुलेमानी और अबू महदी की शहादत
याद कीजिए कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी (Iran America War) को कैसे शहीद किया गया। सीरिया और पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर ईरान से अमेरिका बात करना चाहता था। ऐसा उसने दिखाया। अमेरिका ने इसके लिए इराक और सऊदी अरब को तैयार किया। इन दोनों देशों की तरफ से ईरान के कासिम सुलैमानी से बात शुरू की गई। तय हुआ कि तीन जनवरी साल 2020 को अमरीका और ईरान के कासिम सुलेमानी के बीच बगदाद में वार्ता होगी। बस अमेरिका का काम हो गया। कासिम सुलेमानी को बगदाद आना ही था, वार्ता के लिए। इसमें तो कोई तकनीक की जरूरत नहीं थी। जैसे ही कासिम सुलेमानी का जहाज बगदाद एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। कतर में अमेरिका का अड्डा सक्रिय हो गया। वहां से ड्रोन अटैक का अमेरिका ने आतंकी कार्रवाई की और कासिम सुलेमानी को शहीद कर दिया गया। उनके साथ मौजूद इराकी पॉपुलर मॉबिलाइजेशन फोर्स के कमांडर अबू महदी अल मोहंदिस भी शहीद हो गए थे। ईरान के ये कमांडर कासिम सुलेमानी आइएसआइएस और अलकायदा को निपटाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। उनको अमेरिका ने शहीद कर दिया। यह अंतर्राष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन था। यह आपराधिक कृत्य था।
ऐसे ही जब हाल ही में तनाव बढ़ा तो अमेरिका ने ईरान के (Iran America War) सामने अपने मित्र देशों के जरिए बातचीत की पेशकश की। ईरानी पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री आमिर अब्दुल्लाहियान से बात चल रही थी। अमेरिका को उसके मित्र देशों के जरिए आमिर अब्दुल्लाहियान की लोकेशन मिल गई और उस हेलीकॉप्टर को निशाना बना दिया गया जो ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और पूर्व विदेश मंत्री आमिर अब्दुल्लाहियान को ले कर जा रहा था।
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12 दिन के युद्ध के पहले दिन क्या हुआ
पिछले 12 दिन के युद्ध में यही हुआ। अमेरिका ने ओमान के जरिए बातचीत की पेशकश रखी। ईरान बातचीत के लिए तैयार हो गया। बातचीत शुरू हो गई। ईरानी विदेश मंत्री बातचीत करने पहुंच गए। इस बीच जब भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत किसी मुद्दे पर अटकती तो वह ईरान में सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी को फोन करते। इसके बाद अली लारीजानी सुप्रीम लीडर को बताते। सुप्रीम लीडर के कार्यालय में बड़े-बड़े सैन्य अधिकारियों की मीटिंग होती तब जो बात तय होती वह ईरानी विदेश मंत्री को बताई जाती और इस तरह बातचीत आगे बढ़ती। इन फोन कॉल्स के जरिए इसराइल ने इन सभी को ट्रेस किया और 13 जून साल 2015 को उस स्थान को टार्गेट कर दिया जहां मीटिंग हुई थी। यह इत्तफाक था कि मीटिंग खत्म हो गई थी और सुप्रीम लीडर वहां से निकल गए थे। इस तरह वह बच गए। बाकी कमांडर शहीद हो गए थे।
सुप्रीम लीडर को कैसे बनाया गया निशाना
इस बार भी यही हुआ। ईरानी सुप्रीम लीडर सैयद अली खामेनेई की हत्या में भी यही हुआ। सुप्रीम लीडर की हत्या की साजिश रची गई। इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए अमेरिका ने फिर बातचीत का नाटक किया। दरअसल वह बातचीत के जरिए मसला हल नहीं करना चाहता था। बस अपना लक्ष्य प्राप्त करना चाहता था। ओमान में बातचीत शुरू हुई। फिर स्विटजरलैंड में बात चल रही थी। बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए गूढ मुद्दे पर मंथन करने के लिए जब लोग सुप्रीम लीडर के कार्यालय पर जमा हुए तो अमेरिका और इसराइल ने मिल कर इस फोन ट्रेस कर इस आपराधिक घटना को अंजाम दिया और सुप्रीम लीडर के साथ ही वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों को भी शहीद कर दिया।
ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी के साथ भी यही हुआ। इनकी हत्या से पहले अमेरिका अजरबाईजान के जरिए अली लारीजानी से बात कर रहा था। माध्यम थे अजरबाईजान के इलहाम अलीयेव। बातचीत शुरू हुई। अली लारीजानी का फोन लोकेशन मिलने लगा और उनकी हत्या कर दी गई।
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तो किसी की हत्या करने में इसराइल की कोई राकेट साइंस नहीं है। धोखा देकर हत्या की जाती है। युद्ध खत्म हो जाए और हर तरफ शांति हो। कोई भी देश किसी को कहीं भी टार्गेट कर सकता है।




