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अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते पर लगी मुहर, दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजिटल हस्ताक्षर किए

Central Desk : ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने तथा तनाव कम करने के लिए तैयार किए गए “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू)” पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजिटल हस्ताक्षर ( Iran America War) कर दिए हैं। इसके साथ ही समझौता आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को इसकी पुष्टि की।

बघाई ने बताया कि (Iran America War )समझौते पर स्विट्जरलैंड में किसी औपचारिक समारोह के बजाय डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च नेताओं द्वारा हस्ताक्षर किए जाने से समझौते का महत्व बढ़ जाता है और इसके उल्लंघन की राजनीतिक कीमत भी अधिक होगी।

उन्होंने कहा कि समझौते का मसौदा रविवार को ही अंतिम रूप ले चुका था, लेकिन कूटनीतिक प्रक्रियाओं और मध्यस्थ देशों के साथ समन्वय के कारण इसकी आधिकारिक घोषणा में कुछ समय लगा।

समझौते को लागू करना सबसे बड़ी चुनौती

ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर करना अपेक्षाकृत आसान था, लेकिन इसे लागू करना कहीं अधिक कठिन होगा। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के अनुभवों और उससे मिली सीख को नहीं भूला है तथा अमेरिका की ओर से होने वाले हर कदम पर करीबी नजर रखी जाएगी।

बघाई ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका अपने दायित्वों का पालन नहीं करता है तो ईरान भी अपनी प्रतिबद्धताओं को आगे नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि तेहरान बिना किसी नरमी के अमेरिकी कदमों की निगरानी करेगा।

 परमाणु वार्ता और प्रतिबंधों पर 60 दिनों में बातचीत

बघाई के अनुसार, फिलहाल प्राथमिकता युद्ध समाप्त करना थी, इसलिए परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को बाद के लिए टाल दिया गया। अब समझौता लागू होने के बाद अगले 60 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दे और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।

उन्होंने दोहराया कि ईरान की मिसाइल क्षमता किसी भी वार्ता का हिस्सा नहीं होगी। उनके शब्दों में, “ईरान की रक्षा क्षमता और मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी पक्ष के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।”

लेबनान का मुद्दा भी समझौते में शामिल

ईरान ने कहा कि उसने अपने सहयोगियों को कभी नहीं छोड़ा है और लेबनान में युद्धविराम उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना ईरान में शांति स्थापित होना। बघाई ने दावा किया कि समझौते के पहले अनुच्छेद में लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का विशेष उल्लेख किया गया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजराइल लेबनान पर हमले जारी रखता है तो इसे अमेरिका की प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा।

 अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू

बघाई ने बताया कि मूल योजना के अनुसार अमेरिका को 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी थी, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागू करने पर सहमति बनी।

उन्होंने दावा किया कि ईरानी जहाज अब बिना किसी बाधा के बंदरगाहों में आ-जा रहे हैं और नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

 तेल प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई व्यवस्था

ईरान ने कहा कि उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया भी बुधवार से शुरू हो गई है। तेहरान का कहना है कि उसे तेल बेचने, परिवहन और बीमा सेवाओं के साथ-साथ भुगतान प्राप्त करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।

बघाई ने यह भी बताया कि ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नई प्रबंधन व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। इसके तहत सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता और अधिकार भी बरकरार रहेंगे।

 संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाएगा

ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसका संवर्धित यूरेनियम भंडार देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा। बघाई ने कहा कि यह तेहरान की “लाल रेखा” है और इस विषय पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

 पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ समझौता

ईरान और अमेरिका के बीच यह समझौता कई महीनों की बातचीत के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता और अन्य क्षेत्रीय देशों के सहयोग से तैयार हुआ। समझौते के तहत युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल समाप्त करने, ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यावसायिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने पर सहमति बनी है।

समझौते के बाद अब 60 दिनों की सत्यापन और वार्ता अवधि चलेगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, सभी प्रतिबंधों की समाप्ति, पुनर्निर्माण, आर्थिक सहयोग और निगरानी तंत्र जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

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समापन में बघाई ने कहा, “ईरान घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह अब भी शेर है। इस युद्ध ने हमें कमजोर नहीं, बल्कि सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर और अधिक मजबूत बनाया है।”

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