Jamshedpur (Jharkhand) : कोल्हान क्षेत्र में जंगली हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही ने ग्रामीणों और किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। सारंडा के जंगलों से लेकर चांडिल स्थित दलमा, बहरागोड़ा और मुसाबनी तक हाथियों के झुंड खेतों में (Kolhan Elephant Terror) घुसकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी से रेल परिचालन भी प्रभावित हो रहा है। पिछले आठ दिनों के दौरान चक्रधरपुर रेल मंडल में करीब 26 घंटे तक हाथियों के कारण रेल परिचालन प्रभावित रहने की जानकारी सामने आई है।
धान की फसल बर्बाद, किसानों की बढ़ी परेशानी
कोल्हान के ग्रामीण इलाकों में धान की फसल तैयार होने के समय हाथियों का खेतों में पहुंचना किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। हाथियों के झुंड (kolhan Elephant terror) खेतों में घुसकर फसल को रौंदने और खाने से नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत प्रभावित हो रही है।
सारंडा, दलमा, बहरागोड़ा और मुसाबनी के आसपास हाथियों की गतिविधियों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। खेतों की रखवाली और रोजमर्रा के काम के दौरान हाथियों से सामना होने की आशंका बनी रहती है।
रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी से परेशानी
हाथियों की आवाजाही का असर रेलवे परिचालन पर भी पड़ रहा है। चक्रधरपुर रेल मंडल में आठ दिनों के दौरान करीब 26 घंटे तक हाथियों की मौजूदगी के कारण परिचालन प्रभावित रहा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे को सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
वन विभाग से प्रभावी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और समय पर सूचना देने की व्यवस्था जरूरी है। प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा जल्द उपलब्ध कराने की मांग भी उठ रही है।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल से झारखंड आने वाले हाथियों की आवाजाही के बीच पारंपरिक गलियारों को सुरक्षित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोल्हान में बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष अब खेती, ग्रामीण सुरक्षा और रेल परिचालन के लिए चुनौती बन गया है।** ऐसे में वन विभाग, रेलवे और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से ही समस्या के प्रभावी समाधान की उम्मीद है।




