Jamshedpur (Jharkhand) : पुराने कोर्ट परिसर स्थित ओल्ड बार भवन के चेंबर नंबर-1 में सोमवार को अधिवक्ता परमजीत कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक (Jamshedpur Advocate News) आयोजित की गई। बैठक में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा पुराने कोर्ट परिसर से संबंधित पारित आदेश पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में अधिवक्ता विनोद कुमार मिश्रा और अक्षय कुमार झा ने बताया कि 9 जुलाई 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आनंद सेन ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट (Jamshedpur Advocate News) किया था कि पुराने कोर्ट परिसर की बाहरी चारदीवारी के भीतर बने झोपड़ियों और वहां की सार्वजनिक संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, विशेष रूप से उपायुक्त की है। इसमें किसी अन्य व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
अधिवक्ता श्रीराम दुबे ने दायर की थी याचिका
बताया गया कि अधिवक्ता श्रीराम दुबे द्वारा पुराने कोर्ट परिसर में कथित अतिक्रमण और लगभग 200 लोगों द्वारा झोपड़ियां बनाए जाने के मामले को लेकर जनहित याचिका (पीआईएल) संख्या 4838/2026 दायर की गई थी। इस याचिका में झारखंड सरकार, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, उपायुक्त, अपर उपायुक्त, वरीय पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के अधिकारी तथा बिष्टुपुर थाना प्रभारी को पक्षकार बनाया गया था।
बैठक में जानकारी दी गई कि 9 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और देखरेख जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।
अपना कार्यक्षेत्र समझें अधिवक्ता
बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि सभी को अपने कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों की मर्यादा का पालन करना चाहिए। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि किसी भी कानूनी या सार्वजनिक मुद्दे पर कदम उठाने से पहले पूरी गंभीरता और विवेक से विचार किया जाना चाहिए। बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि जमशेदपुर जिला बार संघ को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी अधिवक्ता अपने पद या अधिकार का दुरुपयोग न करे।
बैठक में अधिवक्ता परपति भगत, रविंद्र कुमार, संजय द्विवेदी, विद्युत नंदी, सुशील कुमार शर्मा, आई.एन. बनर्जी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।




