Jharkhand BJP News: ऊपर से तय कर दिए जाते हैं पदाधिकारियों के नाम, इसके बाद शुरू होती है चुनाव प्रक्रिया
Jamshedpur : भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी (Jharkhand BJP News) होने का दावा करती है। कहा जाता है कि पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र भी मजबूत है। संगठन में पदाधिकारियों का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होता है। मगर, इस साल हो रहे संगठनात्मक चुनावों ने पार्टी में लोकतांत्रिक तरीके पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिलाध्यक्षों के निर्विरोध चुनावों ने पार्टी के अंदरूनी लोकतंत्र की पोल खोल कर रख दी है।
पहले बात करते हैं जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष पद (Jharkhand BJP News) के लिए हुए चुनावों की। अगर किसी का निर्वाचन होता है तो उसमें कई लोग नामांकन करते हैं। मगर, यहां जिलाध्यक्ष पद के लिए एकमात्र संजीव सिन्हा का नामांकन हुआ है। नामांकन से पहले ही चर्चा थी कि संजीव सिन्हा ही जिलाध्यक्ष बनेंगे। कई नेता यह बता रहे थे। सभी कह रहे थे कि उन्हें कोट नहीं किया जाए। इसके बाद, जब जिलाध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो संजीव सिन्हा ने ही नामांकन किया। नामांकन का समय बीत जाने के बाद तय हो गया था कि वही जमशेदपुर महानगर भाजपा के जिलाध्यक्ष बनेंगे। वही हुआ भी और अगले दिन उनका निर्विरोध निर्वाचन घोषित कर दिया।
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि जिलाध्यक्ष के चुनाव में लोकतंत्र सिर्फ दिखावे का ही रहा। ऊपर से ही तय कर दिया जाता है कि कौन जिलाध्यक्ष होगा। जिसका नाम तय हो जाता है वही नामांकन करता है। यही जमशेदपुर में हुआ। यहां जिलाध्यक्ष पद के लिए संजीव सिन्हा का नाम तय था। उन्हीं ने नामांकन किया और जिलाध्यक्ष घोषित कर दिए गए।
पलामू की बात करें तो यहां के भाजपा जिलाध्यक्ष अमित तिवारी बने हैं। वह तीसरी बार यहां के जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। जिलाध्यक्ष पद के चुनाव में उन्होंने ही नामांकन भरा था। उनके सामने किसी भी पदाधिकारी ने नामांकन नहीं भरा। इस तरह, अमित तिवारी को ही निर्विरोध जिलाध्यक्ष घोषित किया गया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव में भी यही हुआ। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पहले से ही आदित्य साहू का नाम चुन लिया गया था। सारे लोग जानते थे कि आदित्य साहू भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। 13 जनवरी को रांची में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो सियासी मंजर साफ नजर आया। यहां भी सिर्फ आदित्य साहू ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा। इसके बाद ही तय हो गया था कि आदित्य साहू ही प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे वह भी निर्विरोध। वही हुआ भी।
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पार्टी सूत्रों की मानें तो यह हमेशा से होता आ रहा है। पदाधिकारियों का चयन पहले कर लिया जाता है। उसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाती है। सूत्र बताते हैं कि पदाधिकारी के चुनाव में शामिल नेताओं को ऊपर से साफ संदेश जारी किया जाता है कि जिसको ऊपर के नेतृत्व ने चुन लिया है उसके खिलाफ कोई नामांकन नहीं ले। यही नहीं, अगर किसी परिस्थिति में कोई दूसरा नेता नामांकन भर भी दे तो वोट उसी को देने का आदेश है जिसको ऊपरी से पदाधिकारी के पद पर तय कर दिया गया है।
जमशेदपुर में अचानक सुधांशु के खिलाफ बना माहौल
सूत्रों की मानें तो इस बार भी जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष पद पर सुधांशु ओझा की ही ताजपोशी तय थी। बताया जा रहा है कि आरएसएस के लीडर भी सुधांशु के पक्ष में ही थे। मगर, चुनाव प्रक्रिया से दो ही दिन पहले सारा खेल हो गया। जमशेदपुर पश्चिम इलाके के मंडल अध्यक्ष एकजुट हो गए।




