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21 जनवरी को गोपाल मैदान में भव्य टुसू मेला, नहीं बिकेगी हड़िया-दारू

Jamshedpur (Jharkhand): जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आगामी 21 जनवरी को भव्य टुसू मेला (Jamshedpur Tusu Fair) का आयोजन किया जाएगा। मेले को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि मेले के आसपास हड़िया और दारू बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई व्यक्ति नशे का सामान बेचते या लेकर आता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे पुलिस के हवाले किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नशा करके मेले में न आएं।

सोनारी में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में सांसद विद्युत वरण महतो और झामुमो नेता आस्तिक महतो ने टुसू मेले से जुड़ी जानकारी साझा की। आस्तिक महतो ने बताया कि पिछले वर्षों में कुछ लोगों द्वारा मेले के आसपास हड़िया बेचने की शिकायतें मिली थीं, इसी कारण इस बार पहले से ही सख्ती बरतने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह टुसू मेले (Jamshedpur Tusu Fair) का 21वां वर्ष है। पहले टुसू पर्व ग्रामीण इलाकों में खेतों और नदियों के किनारे मनाया जाता था, लेकिन अब इसे शहर में आयोजित करने का उद्देश्य शहरी लोगों को भी इस पारंपरिक पर्व से जोड़ना है। टुसू मेले में हर साल हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। झारखंड के सरायकेला-खरसावां सहित विभिन्न जिलों के अलावा ओडिशा और बंगाल से भी लोग टुसू प्रतिमाएं लेकर यहां पहुंचते हैं।

सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि टुसू पर्व सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि ओडिशा, बंगाल और असम में भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी समय संथाल परगना क्षेत्र में सोहराय पर्व भी मनाया जाता है। टुसू के दौरान लोग परिवार के साथ रहते हैं और बाहर काम करने गए लोग भी घर लौट आते हैं।

सांसद ने टुसू पर्व पर कम से कम तीन दिन की सरकारी छुट्टी की मांग की। उन्होंने कहा कि टुसू पर्व पर लोग मां टुसू से आशीर्वाद लेते हैं और अगले वर्ष अच्छी फसल व समृद्धि की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में टुसू के अवसर पर स्वर्णरेखा नदी में पानी छोड़ा गया था और घाटों की साफ-सफाई भी कराई गई थी।

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सांसद ने बताया कि इस बार टुसू मेले में पुरस्कार राशि बढ़ाई गई है। पिछले साल जहां पहला पुरस्कार 31 हजार रुपये का था, वहीं इस साल इसे बढ़ाकर 41 हजार रुपये कर दिया गया है। पिछले वर्ष लीगल मैदान में करीब 350 टुसू प्रतिमाएं और चौड़ल शामिल हुए थे, इस बार संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। झूमड़ गायक मंडलियों को लेकर बातचीत जारी है, जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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