Jamshedpur (Jharkhand) : नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन मामले में पुलिस जांच ने चौंकाने वाले खुलासे (Jamshedpur Connection Of Noida Violence) किए हैं। इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य साजिशकर्ता जमशेदपुर स्थित एनआईटी का पूर्व छात्र आदित्य आनंद बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस ने इस मामले में तीन प्रमुख आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से दो को गिरफ्तार (Jamshedpur Connection Of Noida Violence) कर लिया गया है।
पुलिस जांच के अनुसार, यह हिंसा अचानक नहीं भड़की थी, बल्कि इसे पहले से सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। हजारीबाग निवासी आदित्य आनंद, जिसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, पिछले कुछ वर्षों से देशभर में ऐसे आंदोलनों को भड़काने में सक्रिय रहा है। उसके साथ इस साजिश में बिहार निवासी रूपेश रॉय और मनीषा चौहान भी शामिल थे। दोनों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा पहुंचे थे। इसके बाद 9 और 10 अप्रैल को मजदूरों को जोड़ने के लिए क्यूआर कोड के जरिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए। इन ग्रुप्स के माध्यम से भड़काऊ संदेश फैलाए गए, जिससे भीड़ को उकसाया गया और प्रदर्शन हिंसक हो गया।
नोएडा के फेज-2 स्थित होजियरी कॉम्प्लेक्स में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं हुईं। पुलिस का कहना है कि इस हिंसा को बढ़ाने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही।
साइबर जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि हिंसा के दौरान “अनुषी तिवारी” और “मीर इलियास” नाम के दो एक्स (ट्विटर) अकाउंट से लगातार भ्रामक और झूठी खबरें फैलाई जा रही थीं। जांच में पता चला कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे। इनका उद्देश्य भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति फैलाना था।
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पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, फरार आरोपी आदित्य आनंद की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस इस मामले को आंतरिक सुरक्षा से जोड़कर भी जांच कर रही है।




