NEET विवाद के बीच बढ़ी सियासी हलचल, केंद्र सरकार प्रेशर में
New Delhi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि यह फैसला उन्होंने देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के व्यापक हित को ध्यान में रखकर (Education Minister Resign) लिया है।
NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के देशव्यापी विरोध के बीच उनके इस्तीफे ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (Education Minister Resign) के बाद फिलहाल केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा विभाग का भी चार्ज दिया गया है।

New Education Minister Prahlad Joshi
सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही सर्वोच्च
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने इस्तीफा पत्र में कहा कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही सर्वोच्च होनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि उनका उद्देश्य कभी पद पर बने रहना नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या कानूनी विवाद की वजह से प्रभावित नहीं होना चाहिए, इसलिए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि पिछले कई दशकों से वह शिक्षा सुधार, छात्र हित और शिक्षकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य करते रहे हैं। उनके अनुसार, किसी भी देश की प्रगति का आधार मजबूत, पारदर्शी और समावेशी शिक्षा व्यवस्था होती है।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी उल्लेख किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया और भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने की घोषणा की गई।
उन्होंने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक कराई गई। 16 जुलाई को जारी परिणामों में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ लोगों द्वारा छात्रों को भ्रमित किए जाने पर उन्होंने दुख भी जताया।
मानसिक तौर पर व्यथित हुए धर्मेंद्र
अपने इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हाल की घटनाओं ने उन्हें मानसिक रूप से व्यथित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का है। वह नहीं चाहते कि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य राजनीतिक विवादों या लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर देश, ओडिशा और युवाओं की सेवा करते रहेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार की ओर से नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और शिक्षा सुधार को लेकर पूरे देश में व्यापक चर्चा चल रही है।




