Jamshedpur (Jharkhand) : टाटानगर रेलवे यार्ड में करंट लगने से झुलसे युवा तकनीशियन आशीष माझी की मौत के बाद मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर परिजनों का आंदोलन (Tatanagar Station Protest) तेज हो गया है। मंगलवार को परिजन आशीष माझी का शव लेकर टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचे और स्टेशन परिसर में शव रखकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान रेलवे प्रशासन और परिजनों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
गौरतलब है कि सोमवार को एडीआरएम समीर सौरभ की अध्यक्षता में रेलवे प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और परिजनों के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। बैठक बेनतीजा रहने के बाद परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी (Tatanagar Station Protest) बढ़ गई।
मंगलवार को परिजन टीएमएच पहुंचे और आशीष माझी का शव प्राप्त किया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद रेलवे अधिकारियों ने शव सौंपने से पहले यह लिखित आश्वासन देने की मांग की कि शव के साथ किसी प्रकार का धरना-प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई।
इसी दौरान जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति अस्पताल पहुंचीं। परिजनों का कहना है कि उनके पहुंचने के बाद रेलवे अधिकारी वहां से चले गए, जिसके बाद टीएमएच प्रबंधन ने शव परिजनों को सौंप दिया। जीआरपी की निगरानी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और फिर शव को टाटानगर स्टेशन लाया गया।
स्टेशन परिसर में धरना समाप्त कराने के लिए आरपीएफ अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत की। परिजनों का आरोप है कि उन पर धरना खत्म करने के लिए दबाव भी बनाया गया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग रहे।
मृतक के परिजनों ने परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी और 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि हादसा ड्यूटी के दौरान रेलवे परिसर में हुआ था, इसलिए परिवार की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन को उठानी चाहिए। हालांकि रेलवे अधिकारियों ने आर्थिक सहायता और अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन अब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है।
परिजनों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित सहमति नहीं मिलती, तब तक आशीष माझी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर रेलवे गेट जाम, धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
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गौरतलब है कि 30 मई को टाटानगर रेलवे यार्ड में वंदे भारत एक्सप्रेस की छत पर लगे एसी सिस्टम की मरम्मत के दौरान आशीष माझी ओवरहेड बिजली लाइन की चपेट में आ गए थे। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उनका इलाज चल रहा था, लेकिन कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद से परिजन न्याय, उचित मुआवजा, नौकरी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।




