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पश्चिमी सिंहभूम प्रशासन की चूक से गरमाई झारखंड की सियासत, अर्जुन मुंडा की नाराजगी पर भाजपा हमलावर

भाजपा को सरकार पर हमला बोलने का मिला बड़ा मुद्दा, प्रशासन सफाई देने में जुटा

Chaibasa (Jharkhand) : झारखंड में इन दिनों पश्चिमी सिंहभूम प्रशासन की कथित प्रशासनिक चूक को लेकर राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री Arjun Munda की नाराजगी ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया ( Chaibasa Arjun Munda Dispute) है। भाजपा इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता और सरकार की कार्यशैली से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रही है, जबकि जिला प्रशासन सफाई देने में जुट गया है।

दरअसल, 14 मई को पश्चिमी सिंहभूम जिले के किरीबुरू में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अर्जुन मुंडा पहुंचे थे। उनका रात्रि विश्राम चाईबासा सर्किट हाउस में तय था। अगले दिन वहां से लौटने के बाद अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसने राज्य की राजनीति (Chaibasa Arjun Munda Dispute) में हलचल पैदा कर दी।

अपने पोस्ट में अर्जुन मुंडा ने पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन पर सामान्य शिष्टाचार और आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि भले ही वह वर्तमान में सांसद, विधायक या मंत्री नहीं हैं, लेकिन वे राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं। ऐसे में उनके साथ हुआ व्यवहार प्रशासनिक अनुभवहीनता, अकड़ और सामाजिक मर्यादाओं के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामाजिक सौजन्यता और प्रशासनिक शिष्टाचार का पालन करे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं और जनजातीय समाज के सम्मान की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अर्जुन मुंडा जैसे वरिष्ठ नेता के प्रति गरिमामय व्यवहार अपेक्षित था।

Chaibasa Arjun Munda Dispute: देर रात पहुंचे थे अर्जुन मुंडा

सूत्रों के अनुसार अर्जुन मुंडा रात करीब साढ़े 12 बजे चाईबासा सर्किट हाउस पहुंचे थे। उनके और उनके सुरक्षा कर्मियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। हालांकि अर्जुन मुंडा ने भोजन लेने से इनकार करते हुए सिर्फ एक गिलास दूध मांगा था। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि उन्हें दूध उपलब्ध कराया गया और उनके साथ आए अन्य लोगों ने भोजन किया।

सुबह नाश्ते की भी व्यवस्था थी और अर्जुन मुंडा सुबह करीब आठ बजे वहां से रवाना हो गए। प्रशासन का कहना है कि उस दौरान किसी तरह की नाराजगी सामने नहीं आई।

Chaibasa Arjun Munda Dispute: प्रशासन ने दी सफाई

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की कमी होती तो अर्जुन मुंडा के पीए या सहयोगियों की ओर से संपर्क किया जाता। लेकिन ऐसा कोई फोन या शिकायत नहीं मिली। अधिकारियों के अनुसार आवभगत में कोई कमी नहीं छोड़ी गई थी।

हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि संभवतः कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रात में सर्किट हाउस नहीं पहुंचा, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री नाराज हो गए। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जब अर्जुन मुंडा से पूछा गया कि आखिर उन्हें कौन सी बात नागवार गुजरी, तो उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जो लिख दिया वही काफी है और इस विषय पर वह अधिक कुछ नहीं बोलेंगे।

प्रशासनिक व्यवस्था पर पहली बार इतने मुखर दिखे अर्जुन मुंडा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अर्जुन मुंडा का इस तरह सार्वजनिक रूप से प्रशासनिक व्यवहार पर सवाल उठाना महत्वपूर्ण है। भाजपा अब इसे राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्यशैली और संवेदनहीनता से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गई है।

इसे भी पढ़ें – बागबेड़ा के बाद अब कदमा मंडल अध्यक्ष को लेकर भाजपा में बवाल, कार्यकर्ताओं ने हटाने की उठाई मांग

क्या बोले एनडीसी

पश्चिमी सिंहभूम के नजारत उपसमाहर्ता देवेंद्र ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के आगमन से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि उनकी आवभगत में किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए।

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