Jamshedpur (Jharkhand) : लेडी मेहरबाई टाटा का जीवन महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणादायी मिसाल है। उन्होंने ऐसे दौर में महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और समानता की आवाज उठाई, जब समाज में कई रूढ़िवादी परंपराएं प्रचलित थीं। उनकी सोच और योगदान का (Lady Meherbai Tata, Tata Steel History) प्रभाव आज भी भारतीय समाज और टाटा समूह की विरासत में दिखाई देता है।
मेहरबाई टाटा का जीवन टाटा स्टील के इतिहास से भी जुड़ा रहा। 1920 के दशक में कंपनी आर्थिक संकट से गुजर रही थी। उस कठिन समय में उनके पति सर दोराबजी टाटा ने कंपनी को बचाने के लिए अपनी निजी संपत्ति तक गिरवी रख दी थी। इसमें मेहरबाई का प्रिय जुबली डायमंड भी शामिल था। इस त्याग ने टाटा स्टील को संकट से उबरने में मदद की और भारत के औद्योगिक विकास को मजबूती प्रदान की।
सर दोराबजी और मेहरबाई के निधन के बाद जुबली डायमंड बेच दिया गया। इससे प्राप्त धनराशि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट को दी गई,(Lady Meherbai Tata, Tata Steel History)जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य, वैज्ञानिक अनुसंधान और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।t
मेहरबाई महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों की प्रबल समर्थक थीं। उन्होंने महिला संगठनों को मजबूत करने, पर्दा प्रथा समाप्त करने और छुआछूत के खिलाफ जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई। वह एक कुशल टेनिस खिलाड़ी भी थीं और अपने करियर में 60 से अधिक ट्रॉफियां जीतने का गौरव हासिल किया।
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18 जून 1931 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उनकी स्मृति से जुड़ा टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल कैंसर उपचार, अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
लेडी मेहरबाई टाटा का जीवन संदेश देता है कि वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य, समान अवसर और सम्मानपूर्ण जीवन सुनिश्चित करने में है।




