News Bee: एसेंबली ऑफ एक्सपर्ट ने इस्लामी गणराज्य ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन के लिए संभावित उम्मीदवारों की एक सूची (Iran New Supreme Leader) तैयार कर ली है। विशेषज्ञ सभा के सदस्य सैय्यद अहमद खातमी ने ईरानी सरकारी टेलीविजन से बातचीत में पुष्टि की कि नया नेता “यथाशीघ्र” चुना जाएगा और प्रक्रिया संवैधानिक ढांचे (Iran New Supreme Leader) के भीतर आगे बढ़ रही है।
खातमी ने कहा कि सभा नए नेता के चयन के काफी करीब है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहीद नेता Sayyed Ali Khamenei की हत्या के बाद “दुश्मन ताकतें” विशेषज्ञ सभा की साख को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
वहीं, सभा के एक अन्य सदस्य सैय्यद मुजतबा हुसैनी ने अधिक संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में समय लग सकता है, क्योंकि इसके लिए व्यापक विचार-विमर्श और विभिन्न शर्तों पर सहमति जरूरी है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सभा जल्द बैठक कर अंतिम निर्णय घोषित करेगी।
Iran New Supreme Leader: अंतिम बैठक अंतिम संस्कार के बाद संभव
फार्स समाचार एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, अंतिम आमने-सामने की बैठक शहीद खामेनाई के अंतिम संस्कार के बाद आयोजित की जा सकती है, जो अगले सप्ताह प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि सैयद अली खामेनाई ने अपने जीवनकाल में किसी उत्तराधिकारी को नामित नहीं किया था और यह जिम्मेदारी विशेषज्ञ सभा पर छोड़ी थी।
खामेनेई ने जून 1989 में इस पदभार को संभाला था, जब इस्लामी गणराज्य के संस्थापक सैयद रूहुल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था। उन्होंने लगभग 36 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया।
Iran New Supreme Leader: अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन
ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत खामेनेई के निधन के बाद एक अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन किया गया है, जो नए नेता के चयन तक दायित्व निभाएगी।
इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई और गार्जियन काउंसिल से जुड़े धर्मगुरु शेख अली रज़ा अराफी शामिल हैं।
सर्वोच्च नेता का महत्व
ईरान में सर्वोच्च नेता का पद, जिसे वली-ए-फकीह भी कहा जाता है, देश की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकार है। यह पद कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीनों पर व्यापक प्रभाव रखता है और राष्ट्रीय नीतियों से लेकर रणनीतिक दिशा तक निर्णायक भूमिका निभाता है।
इसे भी पढ़ें – Iran Security Chief: क्या 500 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद भी ‘America First’?
ईरान की इस राजनीतिक हलचल पर वैश्विक नजरें टिकी हुई हैं। भारत के झारखंड सहित दुनिया भर में इस घटनाक्रम को लेकर विश्लेषण जारी है, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।




