News Bee : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल को अंतरराष्ट्रीय कानून से ऊपर समझे जाने की नीति (Iran America Tension) को क्षेत्रीय अस्थिरता का सबसे बड़ा कारण बताया है। उन्होंने कहा कि “दण्डमुक्ति का सिद्धांत शांति नहीं, बल्कि व्यापक संघर्ष को जन्म देता है।”
शनिवार को अल जज़ीरा फोरम के उद्घाटन सत्र में विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए अराघची ने कहा कि गाजा में जारी युद्ध अब केवल एक मानवीय संकट नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक नैतिकता की बड़ी परीक्षा बन गया है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर किसी एक देश को कानून से ऊपर रखकर क्षेत्र में स्थिरता कायम रखने की कोशिश की जाएगी, तो यह गंभीर गलत आकलन होगा। इससे शांति नहीं, बल्कि अस्थिरता फैलेगी।”
गाजा में ‘सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि नरसंहार’
अराघची ने गाजा की स्थिति को “दो बराबर पक्षों के बीच संघर्ष” मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वहां नागरिकों के जीवन, बुनियादी ढांचे और आबादी को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर नरसंहार की श्रेणी में आता है।
उनके मुताबिक, इजरायल को मिली अंतरराष्ट्रीय छूट ने एक खतरनाक मिसाल कायम की है, जिससे आम नागरिकों पर हमले, सीमापार हत्याएं और सैन्य कार्रवाई बिना जवाबदेही के हो रही हैं।
“यह सिर्फ फिलिस्तीन नहीं, पूरी दुनिया का मुद्दा”
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यह केवल फिलिस्तीन (Iran America Tension) का संकट नहीं, बल्कि वैश्विक समस्या बन चुका है, क्योंकि अब अंतरराष्ट्रीय संबंध कानून से नहीं बल्कि ताकत के आधार पर तय हो रहे हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि गाजा में जबरन विस्थापन और तबाही के बाद वेस्ट बैंक में भी कब्जे और विलय की कोशिशें तेज हो सकती हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ेगी।
इजरायल पर सख्त कार्रवाई की मांग
अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल के खिलाफ ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सिर्फ चिंता जताने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जवाबदेही तय करनी होगी।
उन्होंने व्यापक और लक्षित प्रतिबंध, हथियारों की आपूर्ति पर रोक, सैन्य और खुफिया सहयोग निलंबित करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कार्रवाई की मांग की।
मुस्लिम देशों और ग्लोबल साउथ से एकजुटता की अपील
अराघची ने मुस्लिम देशों, अरब राष्ट्रों और ग्लोबल साउथ से एक संयुक्त कूटनीतिक मोर्चा बनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि स्थायी शांति तभी संभव है जब कब्जा खत्म हो, अपराधों की जवाबदेही तय हो और पूर्वी अल-कुद्स (यरुशलम) को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य स्थापित किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गाजा के पुनर्निर्माण में करीब 70 अरब डॉलर का खर्च आएगा। युद्ध और संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और अधिकांश नागरिक ढांचा तबाह हो चुका है।
अराघची ने अंत में कहा, “अगर दुनिया शांति चाहती है, तो उसे आक्रामकता को पुरस्कृत करना बंद करना होगा। फिलिस्तीन क्षेत्रीय सुरक्षा की बुनियाद है।
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