Jamshedpur (Jharkhand): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कानूनी जानकारी के अभाव में कई निर्दोष लोग जेल तक पहुंच जाते हैं, इसलिए संविधान और कानूनों की जानकारी लोगों तक उनकी मातृभाषा (President Jamshedpur Visit) में पहुंचना बेहद जरूरी है। उन्होंने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे संताली भाषी समाज को अपने अधिकारों की बेहतर समझ मिलेगी।

President Jamshedpur Visit
राष्ट्रपति सोमवार को जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान परिसर में आयोजित 22वें संताली भाषा दिवस ‘परसी महा’ और ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समापन समारोह को (President Jamshedpur Visit) संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम से पूर्व उन्होंने जाहेरथान में पूजा-अर्चना भी की। इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। समारोह की विशेष बात यह रही कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों ने संताली भाषा में संबोधन किया।
राष्ट्रपति ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर 26 दिसंबर को ओलचिकी लिपि में भारतीय संविधान का प्रकाशन किया गया, जो संताली समाज को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने संताली साहित्यकारों और ओलचिकी के प्रचार-प्रसार में जुटे लोगों की सराहना करते हुए कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा दी गई यह लिपि संताली समाज की मजबूत पहचान है। आज संताली भाषा में गूगल और विकिपीडिया की उपलब्धता को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया।
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राष्ट्रपति ने चिंता जताई कि संताली समाज में शिक्षा का स्तर अभी और बेहतर होना चाहिए। उन्होंने अपील की कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोग ओलचिकी लिपि का अधिकाधिक उपयोग करें, ताकि भाषा और संस्कृति और समृद्ध हो सके। इस दौरान उन्होंने संताली भाषा में पारंपरिक ‘नेहोर गीत’ गाकर ‘जाहेर आयो’ (प्रकृति माता) से समाज को सही मार्ग पर ले जाने की कामना भी की।
लोकभवन के द्वार पर दिखेगी ओलचिकी
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने राज्यपाल से आग्रह किया कि झारखंड के लोकभवन के मुख्य द्वार पर ओलचिकी लिपि में भी ‘लोकभवन’ लिखा जाए, जिस पर राज्यपाल ने सहमति जताई।
12 संताली विभूतियां सम्मानित
समारोह में संताली कला और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 12 विभूतियों को सम्मानित किया गया, जिनमें भोलनाथ बेसरा, दमयंती बेसरा, मुचिराय हेंब्रम, भीमवार मुर्मू, सलखू मुर्मू, रामदास मुर्मू, मुंडा सोरेन, छोटराय बास्के, निरंजन हांसदा सहित टाटा स्टील फाउंडेशन से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे।
राज्यपाल बोले-राष्ट्रपति की सादगी देश के लिए प्रेरणा
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि परसी महा और ओलचिकी शताब्दी समारोह आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति और अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की सादगी और जनजातीय उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता को पूरे देश के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने संताली को आठवीं अनुसूची में शामिल कर ऐतिहासिक सम्मान दिया था।
मुख्यमंत्री ने दोहराया संरक्षण का संकल्प
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार जनजातीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने राष्ट्रपति को ओलचिकी लिपि में संविधान के प्रकाशन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू का योगदान अविस्मरणीय है। राष्ट्रपति मुर्मु के प्रयासों से आदिवासी समाज का मान-सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा है।




