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टाटा मोटर्स ने ट्रांसपोर्ट सेक्शन को किया ठेकेदार के हवाले, 350 कर्मचारियों पर अनिश्चितता के बादल

न्यूज़ बी रिपोर्टर, जमशेदपुर : टाटा मोटर्स कंपनी ने ट्रांसपोर्ट सेक्शन को आफलोड कर दिया है। ट्रांसपोर्ट सेक्शन ठेकेदार के हवाले हो गया है। इससे ट्रांसपोर्ट सेक्शन में काम करने वाले लगभग 350 कर्मचारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल हैं। इन कर्मचारियों का क्या होगा कोई यह नहीं बता पा रहा है। यह कर्मचारी टाटा मोटर्स के आला अधिकारियों और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों के बीच चक्कर काट रहे हैं। इन को लेकर किसी के पास कोई जवाब नहीं है। ट्रांसपोर्ट सेक्शन में लगभग 250 स्थायी कर्मचारी और 100 अस्थायी कर्मचारी काम करते थे। पूरा सेक्शन ठेकेदार के हवाले हो जाने के बाद अब इस सेक्शन को ठेकेदार ही चलाएगा।
टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की आम सभा
ट्रांसपोर्ट सेक्शन को ठेकेदार के हवाले किए जाने से जहां कर्मचारियों में नाराजगी है, तो वहीं इसी बीच टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की 4 फरवरी को आम सभा हो रही है। कर्मचारियों को आमसभा के लिए बुलाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यूनियन को ट्रांसपोर्ट सेक्शन को बचाने का प्रयास करना चाहिए और यूनियन के आला अधिकारियों से बात करनी चाहिए। लेकिन अभी तक टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन ने ट्रांसपोर्ट सेक्शन को लेकर कोई पहल नहीं की है। दूसरी तरफ, टेल्को वर्कर्स यूनियन के नेता भी टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की आमसभा पर सवाल उठा रहे हैं। टेल्को वर्कर्स यूनियन के हर्षवर्धन का कहना है कि टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के पास कर्मचारी हितों को लेकर उपलब्धि गिनाने के लिए कुछ नहीं है। ज्यादातर सेक्शन ठेकेदारों के हवाले किए जा चुके हैं। कर्मचारियों की नौकरी रहेगी या जाएगी इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कर्मचारियों के वेतन में कटौती हो रही है। कोरोना काल में जो गेट बंद हुआ था अभी तक नहीं खुला। आरोप है कि टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन ने 3 साल के बजाय 4 साल का वेतन समझौता किया है। इससे कर्मचारियों का लाखों का नुकसान हुआ है। लीव एनकैशमेंट के दिनों को 240 से 180 कर दिया गया है।कर्मचारियों से 8 घंटे के बजाय 8:30 घंटे काम लिया जा रहा है। इसका जवाब टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन को देना होगा।
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