जमशेदपुर: एक्सएलआरआइ (Jamshedpur XLRI) जमशेदपुर में शनिवार को आयोजित 12वें डॉ. वर्गीज कुरियन मेमोरियल व्याख्यान में प्रमुख वक्ता के रूप में वन्यजीव संस्थान देहरादून के पूर्व निदेशक और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनोद बी. माथुर ने कहा कि भारत के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को पाने के लिए आर्थिक विकास और पारिस्थितिकीय सुरक्षा के बीच संतुलन अत्यावश्यक है।उन्होंने अपने व्याख्यान “विकसित भारत के लिए पारिस्थितिकीय सुरक्षा” विषय पर देते हुए चेताया कि यदि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगले 12 से 35 वर्षों में वैश्विक तापमान में 1.5°C तक की वृद्धि संभव है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ेगा।
डॉ. माथुर ने कहा कि “इकोलॉजी और इकोनॉमी दोनों साथ-साथ चल सकते हैं”, बस जरूरत है ‘नेचर पॉजिटिव ग्रोथ’ की दिशा में ठोस नीतियों और जनजागरूकता की। उन्होंने हरित वित्त, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रकृति आधारित समाधानों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि ये उपाय न केवल रोजगार बढ़ाएंगे, बल्कि समाज की लचीलापन क्षमता भी सुदृढ़ करेंगे।कार्यक्रम का आयोजन फादर अरुप सेंटर फॉर इकॉलॉजी एंड सस्टेनेबिलिटी की ओर से टाटा ऑडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर एक्सएलआरआइ (Jamshedpur XLRI) के निदेशक फादर सेबेस्टियन जॉर्ज, एसजे ने संस्थान की पर्यावरणीय और सामाजिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि एक्सएलआरआइ का उद्देश्य केवल प्रबंधन शिक्षा नहीं, बल्कि जिम्मेदार नेतृत्व का निर्माण है।
प्रो. डॉ. टाटा एल रघुराम ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि एक्सएलआरआइ सतत विकास, ईएसजी नीतियों, ग्रामीण इमर्शन और सीएसआर आधारित शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के अंत में डीन एकेडमिक्स डॉ. संजय पात्रो ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।डॉ. माथुर ने पर्यावरण संरक्षण के लिए 9 महत्वपूर्ण मंत्र भी साझा किए और कहा कि “बिना पर्यावरण के कुछ भी संभव नहीं है।
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